ककराला (बदायूं)। दरगाह शाह शराफत अली के सज्जादनशीं हजरत शाह सकलैन मियां के छोटे भाई व शाह सकलैन एकेडमी के अध्यक्ष हाजी मुमताज मियां सकलैनी को शुक्रवार सुबह मजार शरीफ पर सुपुर्दे खाक किया गया। जनाजे में हजारों लोग शामिल रहे। अधिकारी और नेताओं की भी मौजूदगी रही। उनके इंतकाल के दुख में कस्बे की दुकानें भी बंद रहीं।
बृहस्पतिवार दोपहर बरेली में 70 वर्षीय हाजी मुमताज मियां का इंतकाल हो गया था। शाम को बरेली से उनके पैतृक निवास ककराला में शव लाया गया। यहां शुक्रवार सुबह दस बजे जब जनाजे को घर से लेजाया गया तो हर आंख नम और दिल में मातम था। हरेक व्यक्ति उनके दीदार के लिए बेताब दिखा। सुबह से ही दुकानें बंद रहीं। कतार से सभी को आखिरी दीदार कराया गया।
मजार शरीफ पर जनाजे की नमाज उनके बड़े भाई दरगाह शाह शराफत मियां के सज्जादनशीं हजरत शाह सकलैन मियां ने पढ़ाई। उसके बाद उन्हें उनके वालिद सूफी किब्ला शाह शुजाअत अली मियां के मजारे पाक के करीब सुपुर्दे खाक किया गया। आखिर में दुआ ए मगफिरत हुई। डीजीपी मुकुल गोयल समेत कई लोगों ने फोन करके दुख का इजहार किया। एडीएम प्रशासन ऋतु पुनिया, एसपी सिटी प्रवीण चौहान समेत कई अधिकारी और कई थानों की पुलिस इस दौरान मौजूद रही।
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पूर्व मंत्री और विधायक समेत कई नेता पहुंचे
ककराला में हाजी मुमताज मियां के घर पहुंचकर कई नेताओं व संभ्रांत लोगों ने दुख का इजहार किया। पूर्व मंत्री आबिद रजा, शेखूपुर विधायक धर्मेंद्र शाक्य, पूर्व विधायक आशीष यादव, सपा अल्पसंख्यक सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. यासीन उस्मानी, काजी रिजवान, पूर्व चेयरमैन छुट्टन, हाजी रहीस, हरीश शाक्य व सुधीर मौर्य ककराला पहुंचे और हाजी मुमताज मियां के इंतकाल पर दुख जाहिर किया।
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ककराला को तहसील बदायूं से जोड़ने की उठाई थी आवाज
ककराला की अवाम मुमताज मियां की एक आवाज पर जमा हो जाती थी। सीएए, एनआरसी, तीन तलाक जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर वह अपनी बात को बेबाकी से रखते थे। ककराला की सबसे बड़ी समस्या थी कि यहां के लोगों को भूमि संबंधित कार्यों के लिए तहसील दातागंज जाना पड़ता था। उन्होंने तहसील बदायूं कराने के लिए काफी संघर्ष किया, जिसका सकारात्मक परिणाम भी आया। शाह सकलैन एकेडमी के संस्थापक और अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने गरीब, जरूरतमंद बेटियों के निकाह कराने का काम भी किया। संवाद