बदायूं। प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को हर साल दो जोड़ी यूनीफॉर्म, जूते, मोजे, बैग निशुल्क रुप में दिया जाता था। इस साल प्रदेश सरकार ने नियम में बदलाव करते हुए प्रति बच्चा यूनीफार्म, जूते, मोजे, बैग देने की बजाय उनके खातों 1056 रुपये देने की बात कहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने रुपये में अभिभावक बाजार से कैसे गुणवत्ता वाली चीजों को खरीद पाएंगे।
जिले में परिषदीय स्कूल की संख्या 2155 है। इन स्कूलों में करीब सवा तीन लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इन सभी छात्र-छात्राओं को हर साल शासन की ओर से दो जोड़ी यूनीफॉर्म, जूते-मोजे, बैग और किताब निशुल्क में मुहैया कराया जाता रहा है। हालांकि इसमें लोकल स्तर से लेकर उच्चाधिकारियों तक पर आरोप लगते रहे हैं। इसकी वजह से यह थी कि यह सभी चीजें ठेकेदार के माध्यम से मुहैया कराई जाती रही है। इसमें मोटे कमीशन का खेल चलता रहा है। इसमें बदलाव करते हुए शासन ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से यूनीफॉर्म सिलवाने के निर्देश दिए थे। ताकि इन समूह की महिलाओं को काम मिल सके। साथ ही कमीशन का खेल बंद हो सकेगा, लेकिन शिक्षा माफिया ने इसमें दखल देना शुरू कर दिया है। अब शासन ने इस योजना मेें पूरी तरह से बदलाव कर दिया है। अभिभावकों के खातों में यह धनराशि सीधे पहुंचेगी। इससे माफिया का खेल तो काफी हद तक खत्म हो जाएगा।
- कई ऐसे में छात्र-छात्राएं हैं, जो कभी कभार ही स्कूल आते हैं। जो अभिभावक यूनीफॉर्म को खरीदकर बाजार से लाएंगे उनके रंगों में भी अंतर हो सकता है। हालांकि क्वालिटी बेहतर भी हो सकती है। - सीमा यादव, जिलाध्यक्ष, महिला शिक्षक संघ
परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों या अभिभावकों के खातों में यूनीफॉर्म, जूते-मोजे, बैग की धनराशि भेजी जाएगी। शासन ने काफी सोच-विचार के बाद में यह फैसला लिया है। इससे छात्रों को सीधा फायदा होगा। - डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए