बदायूं। मलेरिया और फैल्सीपेरम के प्रकोप के बीच बुधवार को जिले में डेंगू का पहला मामला सामने आया है। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में बुधवार को डेंगू जैसे लक्षण दिखने वाले दस बुखार पीड़ितों की एलाइजा जांच की गई। इनमें दहगवां के बाजपुर गांव के एक युवक को डेंगू की पुष्टि हुई है। डेंगू का पहला रोगी मिलने के बाद जिले में मलेरिया और बुखार प्रभावित गांवों में अलर्ट कर दिया गया है।
मलेरिया, फैल्सीपेरम और डेंगू के लिहाज से बदायूं के समरेर, दातागंज, सालारपुर और जगत ब्लॉक हाईरिस्क श्रेणी में शामिल हैं। मलेरिया का सीजन शुरू होने के बाद से ही इन गांवों में लगातार मलेरिया और फैल्सीपेरम के रोगी मिल रहे हैं। मलेरिया का सबसे ज्यादा प्रकोप सालारपुर और जगत ब्लॉक में है। बुधवार को जिले में अलग-अलग स्थानों पर 26 हेल्थ कैंप लगाए गए। इस दौरान बुखार पीड़ित 155 लोगों की जांच की गई। इनमें 21 को मलेरिया और तीन रोगियों को फैल्सीपेरम की पुष्टि हुई। इधर, जिला अस्पताल की लैब में बुधवार को डेंगू जैसे लक्षण दिखने वाले 10 बुखार पीड़ितों की जांच की गई। इनमें दहगवां ब्लॉक के बाजपुर गांव के एक युवक को डेंगू की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है। डेंगू पीड़ित की हालत फिलहाल सामान्य है। उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है।
बृहस्पतिवार को दहगवां के बाजपुर गांव में हेल्थ कैंप लगाकर बुखार पीड़ितों की जांच की जाएगी। गांव में काफी संख्या में बुखार पीड़ित हैं। गौर करने वाली बात यह है कि दहगवां ब्लॉक मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से हाईरिस्क नहीं है। ऐसे में यहां डेंगू का रोगी मिलने के बाद स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग के माथे पर चिंता साफ दिखने लगी है।
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आसान हुई एलाइजा जांच, जिला अस्पताल में ही जांच के बाद मिल रही रिपोर्ट
बदायूं। डेंगू की पुष्टि के लिए एक मात्र भरोसेमंद एलाइजा जांच को ही माना जाता है। अब तक जिला अस्पताल में एलाइजा जांच की व्यवस्था नहीं थी। हाल ही में पैथोलॉजी को एलाइजा जांच के लिए मशीनें मिली हैं। 15 सितंबर से यहां एलाइजा जांच हो रही है। दरअसल, अब तक एलाइजा जांच के लिए सैंपल बरेली और लखनऊ भेजे जाते थे। बरेली जिला अस्पताल की लैब पर ज्यादा दबाव होने और सैंपल लखनऊ तक भेजे जाने के कारण जांच रिपोर्ट आने में कई-कई दिन लग जाया करते थे। अब जिला अस्पताल में ही एलाइजा जांच की सुविधा होने के बाद रिपोर्ट जल्द मिल रही है। ऐसे में समय से रिपोर्ट मिलने पर डेंगू पीड़ित का समय से इलाज होगा और उसकी जान बचाई जा सकेगी। संवाद
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फॉगिंग के लिए अब तक बजट ही नहीं मिला
बदायूं। मलेरिया विभाग को इस वर्ष मच्छरनाशक फॉगिंग के लिए बजट ही नहीं मिला है। विभाग की ओर से पांच लाख रुपये का बजट मांगा गया है। दरअसल, फॉगिंग पायराथ्रेम दवा का की जाती है। एक लीटर पायराथ्रेम की फॉगिंग के लिए 18 लीडर मिट्टी के तेल की जरूरत होती है। पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण फॉगिंग पर रोक थी। इसके कारण बजट नहीं मिला था। इस बार भी अब तक बजट नहीं मिला है। मलेरिया विभाग के पास 149 लीटर पायराथ्रेम थी। इसमें 100 लीटर पायराथ्रेम मथुरा भेज दी गई। 49 लीटर दवा अब भी है, लेकिन इसके लिए मिट्टी के तेज का बजट ही नहीं है। ऐसे में फॉगिंग भी नहीं हो पा रही और मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।
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ये भी जानें
22 सितंबर को कुल जांच- 1555
हेल्थ कैंप- 26
मलेरिया के कुल रोगी- 24
पीवी मलेरिया- 21
फैल्सीपेमर-03
डेंगू/मलेरिया आरक्षित बेड-120
डीडीटी छिड़काव-30 गांव
लार्वा मिला- 22 स्थान
सक्रिय रोगियों की संख्या- 176
सक्रिय फैल्सीपेरम-03
डेंगू रोगी- 01
अब तक जांच- 12001
अब तक मिले कुल रोगी-1008
मलेरिया प्रभावित ब्लॉक-05
डेंगू प्रभावित ब्लॉक-01
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पिछले वर्ष के मुकाबले मलेरिया इस वर्ष काबू में है। बुधवार को डेंगू का एक मामला सामने आया है। अब एलाइजा जांच जिला अस्पताल में ही हो रही है। डेंगू रोगी की हालत सामान्य है। उसे समय से इलाज मिलने लगा है। मलेरिया विभाग की ओर से फॉगिंग के लिए बजट की मांग की गई है। जिले में मच्छरजनित बीमारियों या बुखार से अब तक कोई जान नहीं गई है।
-डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ