उझानी में कथा में व्यास गद्दी पर विराजमान परमानंद महाराज की आरती करते यजमान। संवाद
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उझानी (बदायूं)। हनुमान गढ़ी मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में दूसरे दिन सोमवार को कथावाचक परमानंद महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। कहा कि कंस का स्वभाव शुरू से ही अत्याचारी रहा। आकाशवाणी सुनने के बाद कंस ने देवकी और वासुदेव को बंदी बनाकर कारागार मे डाल दिया। उन्हें कष्ट भी दिए गए लेकिन दोनों का ईश्वर में विश्वास कायम रहा।
कथावाचक परमानंद महाराज ने कहा कि ईश्वर में विश्वास से ही मानव का कल्याण हो जाता है। मथुरा कारागार में बंद देवकी और वासुदेव को कंस ने बहुत कष्ट दिए। वह हरहाल में देवकी की आठवीं संतान को मारना चाहता था लेकिन देवकी और वासुदेव ने ईश्वर में विश्वास कायम रखा। कृष्ण के रूप में आठवीं संतान भी कारागार में ही हुई लेकिन कंस उसका बाल भी बांका नहीं कर पाया। परमानंद महाराज ने कृष्ण की बाल लीलाओं का भी संगीतमय वर्णन किया।
कहा- गोकुल में कृष्ण ने जो लीलाएं कीं, उन्हें सुनने से मनुष्य भाव विभोर हो जाता है। यहां तक महादेव खुद प्रभु की बाल लीलाओं से रूबरू होने के लिए भिक्षक बनकर पहुंच गए थे। जबकि प्रभु उनकी इच्छा को जान गए थे लेकिन मां यशोदा को महादेव पर सहज विश्वास नहीं हो पाया। वह अपने लाडले के प्रेम में वशीभूत थीं।
दूसरे दिन कथा शुरू होने पर पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल और पालिकाध्यक्ष पूनम अग्रवाल ने परमानंद महाराज समेत व्यास गद्दी की आरती की। व्यवस्थाओं में रामप्रवेश यादव, गोपीबल्लभ शर्मा, उदय सिंघल आदि का सहयोग रहा। संवाद