बदायूं। पिछले कुछ साल से राजकीय पॉलीटेक्निक में पढ़ा रहे अतिथि प्रवक्ताओं की नौकरी खतरे में आ गई है। उन्होंने नौकरी बचाने के लिए जिम्मेदारों को पत्र सौंपा है। उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश हैं कि उन्हें नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। इसके बावजूद उन्हें निकाला जा रहा है।
बृहस्पतिवार को डीएम कार्यालय पहुंचे अतिथि प्रवक्ताओं ने बताया कि वह राजकीय पॉलीटेक्निक बदायूं, अलापुर और सहसवान में वर्ष 2017-18 से पढ़ाते आ रहे हैं। उनके पढ़ाने के दौरान पॉलीटेक्निक का रिजल्ट शत प्रतिशत रहा है अब उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
कोरोना संक्रमण काल के दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाया था। उन्हें मानदेय के रूप में पंद्रह हजार रुपये दिए जा रहे थे। एक माह से उनका मानदेय तक नहीं दिया गया है।
इस संबंध में हाईकोर्ट में एक पिटीशन दायर की गई थी। उस पर हाईकोर्ट का आदेश है कि उन्हें नौकरी से न निकाला जाए। इसके बावजूद उन्हें राजकीय पॉलीटेक्निक से नौकरी से निकाला जा रहा है। इसके अलावा सहसवान का राजकीय पॉलीटेक्निक अलापुर के राजकीय पॉलीटेक्निक में समायोजित किया जा रहा है। इससे सभी प्रवक्ता बेरोजगार हो जाएंगे और उन्हें सड़क पर आना पड़ेगा। उन्होंने डीएम और नगर विकास मंत्री को पत्र सौंपकर नौकरी से न निकालने की मांग की है। इस दौरान संदीप सिंह, रूपेंद्र पाल सिंह, राजकुमार माथुर, सचिन, हिमांशु यादव, वासिफ कलीम, सौरभ सक्सेना, राखी भारद्वाज, रीमत यादव, अजहर, रोहित कुमार, मनीश सोलंकी, सोमनाथ मौर्या, शिवानी यादव, लीलू कुमार आदि मौजूद रहे।
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हमारे कई सरकारी प्रवक्ता आ चुके हैं। अतिथि प्रवक्ता की जरूरत नहीं है। अभी सहसवान का राजकीय पॉलीटेक्निक अलापुर में समाहित नहीं किया जा रहा है। हमारे यहां प्रवक्ताओं की संख्या पर्याप्त है। - योगेश सिंह यादव, प्रधानाचार्य राजकीय पॉलीटेक्निक सहसवान