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बंदरों का उत्पात रोकने के लिए आगे नहीं आ रहे जिम्मेदार

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घर की छत पर घूमते बंदर। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। बंदरों ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। खासकर घरों में रहने वाली महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं। इसी तरह ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान पहुंच रहा। बंदरों को हमलों में जहां कई लोग जख्मी हो चुके तो कई की मौत भी हो चुकी है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए जिम्मेदार आगे नहीं आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जरूरी है कि जिम्मेदार आगे आएं और बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ने की व्यवस्था की जाए।
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शहर के ब्राहमपुर, चौबे मोहल्ला, टिकटगंज, जवाहरपुरी, पंजाबी मोहल्ला, नई सराय, पुरानी चुंगी, लालपुल और कचहरी इलाकों क लोग बंदरों से सबसे ज्यादा परेशान हैं। यहां बंदर घरों में घुस जाते हैं और सामान उठाकर ले जाते हैं। इसके अलावा कई लोगों पर हमला भी कर चुके है। लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर नगर पालिका और वन विभाग एक दूसरे पर मामला टाल देते हैं।
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कुछ दिन पहले ही बंदर ने काट लिया था। इससे हाथ में घाव हो गया। बंदर रोजाना ही किसी ने किसी को काट रहे हैं। इससे हम लोग बहुत ज्यादा परेशान हैं।
- आरती
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ब्राहमपुर मोहल्ले में बंदर बहुत ज्यादा हैं। रोज किसी न किसी को काट रहे हैं। हालात ये है कि शायद ही कोई बचा हो जिस पर बंदरों ने हमला न किया हो।
-राधा मौर्या
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बंदरों के डर से हर समय घर का दरवाजा बंद रखते हैं। इसके बावजूद बंदर घर में घुस जाते हैं। जो सामान दिखाई देता है उसे उठा ले जाते हैं।
-रामचरन
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जिला प्रशासन को बंदरों का उत्पात रोकने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। इन्हें पकड़कर कहीं दूर जंगल में छोड़ा जाए। इससे शहर या गांव के लोग सुरक्षित रह सकें।
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-सुभाष गुप्ता
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नगर पालिका और वन विभाग को बंदरों की रोकथाम को कदम उठाना चाहिए। पकड़वाकर दूर पहुंचाया जाए, जिससे बंदरों का खौफ कम हो।
-सुशीला गुप्ता
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बंदरों का उत्पात रोका जाए। अगर ऐसा ही चलता रहा तो कोई चीज सुरक्षित नहीं रहेगी। बंदर और बढ़ जाएंगे फिर लोगों को और ज्यादा मुश्किल होगी।
-ऊषा
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ग्राम पंचायत या नगर निकाय से आवेदन मिलेगा तो प्रदेश मुख्यालय से अनुमति जारी कराकर मथुरा की संस्था से उनका संपर्क करा देंगे। इसके लिए बजट ग्राम पंचायत या नगर निकाय को ही करना पड़ेगा। मथुरा की संस्था ही बंदरों को पकड़ेगी। बाद में इन्हें जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
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-अशोक कुमार सिंह, डीएफओ
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