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यूपी: समय बदला तो बदल गई सपा की बोली

Sun, 14 Jul 2013 01:45 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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पुरानी कहावत है कि सियासत में सुविधा की भाषा बोली जाती है। समय के हिसाब से जो बचा सके, नेता उसे ही बोलना पसंद करता है।
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बाबू सिंह कुशवाहा के कुनबे के सपा में शामिल होने पर एक बार फिर यह साबित हो गया। जिस सपा ने बाबू सिंह कुशवाहा के भाजपा में शामिल होने पर बड़ी डील की बात कही थी, वही सपा के नेता अब जब कुशवाहा का कुनबा उनके यहां आ गए तो डील से इनकार कर रही है।

तर्क दे रही है कि सामाजिक आंदोलन और गरीबों के लिए कुशवाहा के परिवार के किए गए कामों से प्रभावित होकर उन्हें पार्टी में लिया है, जो भाजपा तब डील से पल्ला झाड़ रही थी।
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उसी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सपा पर कुशवाहा के कुनबे को पार्टी में लेने के लिए बड़ी डील का आरोप लगाया है।

सपा की सपाई
कुशवाहा के कुनबे की सपाई होने की घोषणा करते वक्त चौधरी से भ्रष्टाचार व अपराध पर पार्टी की नीति पर सवाल हुआ तो बोले, ‘हमारी नीति वही है। हम राजनीति के अपराधीकरण और भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं।’

वह यही नहीं रुके। कुशवाहा के कुनबे को शामिल करके दागियों को संरक्षण देने का सवाल हुआ तो बोले, ‘अगर कुशवाहा ने अपराध किया है। वह दोषी हैं तो जांच चल रही है। न्यायालय अपना फैसला देगा।

पर, कुशवाहा के किसी मामले में फंसें होने में उनकी पत्नी, भाई और परिवार के अन्य लोग तो दोषी हो नहीं गए।’ चौधरी ने पलटकर यह सवाल भी किया, ‘क्या किसी पति और भाई के दोष की सजा उसके भाई और पत्नी को दी जानी चाहिए।

पहले की थी खिंचाई
इससे पूर्व कुशवाहा के भाजपा में शामिल होने के वक्त सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा था कि अब यह बात दिन के उजाले की तरह साफ हो गई है कि प्रदेश की राजनीति में बसपा, कांग्रेस और भाजपा की तिकड़ी बनी हुई है।

इनमें आपसी समझ के साथ चुनावी चालें चली जा रही है। तीनों ही मिलीभगत से अपने आदमियों को इस या उस दल में खपाने और बचाने का काम कर रहे हैं।

बसपा व भाजपा में पुराने भाई-बहन वाले रिश्ते कायम हैं जबकि कांग्रेस इनके संरक्षक की भूमिका में है।

बसपा राज में भ्रष्टाचार की सड़ांध जब बर्दाश्त के बाहर हो गई और मुख्यमंत्री कार्यालय भी चपेट में आने लगा तो दिखावे के लिए मुख्यमंत्री ने अपने बदनाम मंत्रियों को भाई जी की पार्टी भारतीय जनता पार्टी में भिजवा दिया।

भाजपा में उनका फूलमालाओं से भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री खुद को पाक साफ जताने की कोशिश कर रही हैं। सपा आई तो इन सबको सबक सिखाएगी।

तब भाजपा ने दी थी सफाई
कुशवाहा को भाजपा की सदस्यता दिलाने वाले पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय कटियार ने कहा था, ‘कुशवाहा बसपा के विभीषण है।

भाजपा ने उन्हें मायावती के खिलाफ भ्रष्टाचार की लड़ाई को और धार देने के लिए पार्टी में लिया है।

कुशवाहा पूरी तरह पाक-साफ हैं। उत्तर प्रदेश में मंत्रियों पर जो भी आरोप लग रहे हैं। उसके लिए मुख्यमंत्री मायावती जिम्मेदार हैं। कुशवाहा के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है।

अब भाजपा ने लगाया आरोप
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं, ‘सपा का भ्रष्टाचार से समझौता करने वाला चरित्र उजागर हो गया है। प्रदेश सरकार को अब लैकफेड के मुकदमों सहित अन्य मुकदमों पर अपनी राय बतानी चाहिए।

सपा के वरिष्ठ मंत्री घोटालेबाजों से मिलने जेल में जाते है और उनके लिए भविष्य की राहें तैयार करते है। यह बात आज पूरी तरह साफ हो गई।

मुलायम सिंह यादव को बताना चाहिए कि उनके नाम से बुलाई गई प्रेस कान्फ्रेंस में वह कार्यालय में होते हुए भी क्यों नहीं आए।

आज बसपा के खिलाफ जांच न होने की वजह सामने आ गई। बाबू सिंह के परिवारी जनों का सपा में प्रवेश सपा और बसपा के गठजोड़ को साबित करता है।

फिर बदला सपा का प्रत्याशी
गाजीपुर में तीसरी दफा बदलेगा उम्मीदवार: सूत्रों की मानें तो कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या को सपा के टिकट पर लोकसभा की गाजीपुर सीट से चुनाव लड़ाने पर विचार किया जा रहा है।
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इस सीट से इस समय सपा के राधेमोहन सिंह सांसद हैं। पहले इनका टिकट काटकर पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह को दिया गया था। पर, बाद में ओमप्रकाश के स्थान पर राधेमोहन का टिकट बहाल कर दिया गया। अब सपा नेतृत्व इस सीट पर शिवकन्या को लड़ाने पर विचार कर रहा है।
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