कार्तिक पूर्णिमा पर बनी थी नींदडू़ में हमले की योजना
नींदडू़(बिजनौर)। नींदडू़ युद्ध की घटना कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी है। इस दिन राजस्थान के 12 राजपूत राजाओं ने नींदडू़ के शासक फतह उल्लाह खां को मात देने की योजना बनाई थी। मान्यता है कि नींदडू़ राजा नबल सिंह की राजधानी थी। राजा ने इसे बसाकर नबलगढ़ नाम रखा था, जो बाद में निबलगढ़, निंदड़गढ़ और वर्तमान में निंदडू़ (नींदडू़) हो गया। बाबर के सेनापति फतेह उल्लाह खां ने नबल सिंह की हत्या कर नींदडू़ पर कब्जा कर लिया। 1542 में अमरोहा, ठाकुरद्वारा और बिजनौर का संपूर्ण क्षेत्र जनपद मधी के तहत आता था, जो संभल प्रांत का भाग था।
मधी में श्रवण नामक सिद्ध बाबा का मंदिर व आश्रम था। तुर्क सैनिकों ने हिरन का शिकार कर आश्रम में मांस पकाकर खाया। धार्मिक भावनाएं आहत होने से दुखी बाबा मंदिर छोड़कर गढ़ चले गए। गढ़ में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले में राजस्थान से राजपूत राजा आए थे। उन्होंने बाबा से भोजन ग्रहण का आग्रह किया। हठी बाबा ने उन्हें घटना से अवगत कराया तथा भोजन के लिए नींदडू़ पर हमला कर फतह उल्लाह खां से बदला लेने की शर्त रखी। आरएसएम महाविद्यालय धामपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. चेतन स्वरूप राजावत ने बताया कि राजस्थान के सीकर जिले की रियासत खूड़ की जागीर सुरोडा मोहनपुरा के राजा मुकुट सिंह (मुकुंद सिंह) शेखावत ने फतह उल्लाह खां से बदला लेने का प्रण किया। 12 राजा युद्ध के लिए सहमत हुए।
महाराज मुकुट सिंह शेखावत संस्थान मौरना (बिजनौर) में बने क्षत्रिय स्तंभ पर नींदडू़ युद्ध में शामिल 12 राजा मुकुट सिंह शेखावत, राजा मालदेव सिंह नरूका, राजा राम सिंह राजावत, राजा आनंद सिंह कछवाहा, राजा अमरजीत सिंह हाडा, राजा रणधीर सिंह चौहान, राजा गजानन देव सिंह देवड़ा, राजा मांधाता सिंह चौहान, राजा रामचंद्र सिंह गहलोत, राजा गेपीचंद्र गहलोत, राजा बाघचंद्र त्रिलोकचंद्र बैंस तथा राजा बलभद्र सिंह के नाम अंकित हैं। फतह उल्लाह खां की हत्या के बाद नींदडू़ रियासत को 12 राजाओं ने आपस में बांट लिया।
डॉ. चेतन स्वरूप के मुताबिक नींदडू़ हमले की योजना कार्तिक पूर्णिमा पर बनी थी, लेकिन हमला बाद में हुआ। मधी में मंदिर, आश्रम व नींदडू़ में प्राचीन अवशेष मौजूद नहीं हैं। नींदडू़ में फतेह उल्लाह खां का मजार है, जिस पर उर्स लगता था। सेवानिवृत्त शिक्षक एवं शहर इमाम काजी नूर अहमद फारूकी कहते हैं कि वह अपने दादा काजी सज्जाद अहमद व अन्य बुजुर्गों से नींदडू़ की बाबत फारसी में लिखी पुस्तक के बारे में सुनते आए हैं, लेकिन इस ऐतिहासिक किताब को कभी देखा नहीं गया। (संवाद)
नींदडू में मोरना संस्थान में स्थित क्षत्रिय स्तंभ।- फोटो : BIJNOR