अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। मगर, लापरवाही के चलते लोग एमडीआर श्रेणी में पहुंच रहे हैं। इन मरीजों पर टीबी की सामान्य दवा असरदार नहीं होती है। अभी तक इनके उपचार में नौ माह से ज्यादा समय लगता था। लेकिन, जिले में एमडीआर टीबी रोगियों का नई दवा बीपाल एम से इलाज किया जा रहा है। यह दवाई एमडीआर रोगियों को सामान्य टीबी मरीजों की तरह सिर्फ छह महीने ही खानी पड़ेगी।
जिले में वर्तमान में 8686 टीबी रोगियों का इलाज चल रहा है। इस साल जनवरी से अब तक 2199 मरीज खोजे गए हैं। इनमें 1384 सरकारी और 815 मरीजों की निजी अस्पतालों में पुष्टि हुई। वर्तमान में जिन टीबी रोगियों का इलाज चल रहा है। उनमें 113 एमडीआर टीबी रोगी हैं। जिन पर टीबी की सामान्य दवा बेअसर साबित हुई। अब इनका इलाज बीपाल एम से ही किया जा रहा है। हालांकि, इन मरीजों को लंबे समय दवाई नहीं खानी पड़ेगी। पहले एमडीआर टीबी मरीजों का दो साल और उसके बाद नौ से 12 माह का इलाज चलता था। एमडीआर टीबी रोगियों कम समय में दवाई खाकर ठीक हो जाएंगे।
इन टीबी रोगियों की दी जाती है बीपाल एम दवा
-रोगी की उम्र 14 वर्ष से अधिक हो
-रोगी द्वारा डीआरटीबी की दवा एक माह से कम ली हो एवं विडाकुलीन, लिजोनाइड से सेंसटिव हो
-पुरुष रोगी की ईसीजी 450 से अधिक एवं महिलाओं में ईसीजी 470 से अधिक न हो
-महिला गर्भवती न हो
-बच्चे को दूध पिलाने वाली मां न हो
तीन पोर्टेबल एक्सरे मशीनों से खोजे जा रहे टीबी रोगी
टीबी रोगियों को खोजने के लिए नई पहल गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम चिह्नित गांवों में शिविर लगाकर टीबी संदिग्ध रोगियों के एक्सरे कर रही है। इसके लिए तीन पोर्टेबल एक्सरे मशीन चालू कर दी गई हैं। टीम गांव-गांव पहुंचकर लोगों की जांच कर रही है। इससे टीबी रोगी खोजने में आसानी हो गई है।
आज से चलेगा 100 दिवसीय टीबी रोगी खोजी अभियान
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी रोगी खोजने के लिए 100 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए टीम मलिन बस्तियों, झुग्गी झोपड़ी, मदरसों, स्कूलों में जाकर सैंपल एकत्रित करेगी। वहीं, टीबी विभाग के अनुसार, पिछले साल जनवरी से दिसंबर तक जिले की 81 ग्राम पंचायत टीबी मुक्त हो चुकी हैं।
नियमित इलाज से पा सकते हैं टीबी से छुटकारा
मेडिकल कॉलेज के डाॅ. अभिषेक चौधरी का कहना है कि टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होता है। यह फेफड़ों, हड्डी, मस्तिष्क, पेट आदि अंगों को प्रभावित कर सकता है। टीबी होने पर दो सप्ताह से ज्यादा खांसी रहती है। वजन कम होना, खांसी में खून आना, बुखार, रात में पसीना आना, कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय एवं नियमित इलाज से टीबी रोग से छुटकारा पा सकते हैं।
एमडीआर टीबी रोगियों को बीपाल एम दवाई दी जा रही है। इससे मरीजों का इलाज समय घटकर केवल छह माह रह गया है। टीबी मरीज खोजने के लिए टीम गांव-गांव जा रही है। जिले में खोजे गए सभी मरीजों का इलाज चल रहा है। ....डॉ. अनिल कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी, बिजनौर