फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पद्म सिंह शर्मा से मुंशी प्रेमचंद का रहा गहरा नाता

विज्ञापन
पदम सिंह शर्मा। - फोटो : BIJNOR
विज्ञापन
पद्म सिंह शर्मा से मुंशी प्रेमचंद का रहा गहरा नाता
विज्ञापन

बिजनौर। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद का बिजनौर निवासी पंडित पद्म सिंह शर्मा से गहरा नाता रहा। पद्म सिंह से मुंशी प्रेमचंद के संबंध इतने रहे कि पंडित जी की मृत्यु के बाद उन्होंने एक बड़ा लेख ‘पद्म सिंह शर्मा के साथ तीन दिन’ के नाम से लिखा, जो विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ। पद्म सिंह शर्मा ने मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व से साहित्य जगत को परिचित कराते हुए एक पुस्तक भी लिखी। मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर बिजनौर के साहित्यकार उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
चांदपुर के निकट स्थित गांव नायक नंगला में जन्मे पंडित पद्म सिंह शर्मा का हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनको मुंशी प्रेमचंद अपने बड़े भाई की तरह मानते थे। पद्म सिंह शर्मा के साहित्य पर पीएचडी कर चुके गांव सिसौना निवासी सुशील कुमार त्यागी बताते हैं कि मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास सेवासदन जब बाजार में आया तब यह उनका उर्दू से हिंदी में अनुवादित पहला उपन्यास था। यह उपन्यास 1916 में उर्दू में ‘बाजार ए हुस्न’ के नाम से आया था। 1919 में मुंशी प्रेमचंद ने इसका उर्दू से हिंदी में स्वयं ही अनुवाद किया था, जो सेवासदन के नाम से प्रकाशित हुआ। उस समय उर्दू के साहित्यकारों का बोलबाला था। समीक्षकों ने इसे सिरे से नकार दिया था। पंडित पद्म सिंह शर्मा ने सेवा सदन की समीक्षा लिखी जो उस समय कई समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई। पद्म सिंह शर्मा की समीक्षा में जो तर्क दिए गए थे वह अकाट्य थे। इसके बाद मुंशी प्रेमचंद ने पंडित पदम सिंह शर्मा से कहा था कि पंडित जी आपकी समीक्षा ने मुझे बचा लिया अन्यथा अन्य समीक्षकों ने तो मेरे उपन्यास को सिरे से नकार दिया था। यह घटना ‘पद्म सिंह शर्मा के पत्र’ नामक पुस्तक में प्रकाशित है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुशील त्यागी बताते हैं कि पद्म सिंह शर्मा और मुंशी प्रेमचंद के संबंध बेहद प्रगाढ़ रहे। पद्म सिंह शर्मा के निमंत्रण पर मुंशी प्रेमचंद ज्वालापुर स्थित गुरुकुल महाविद्यालय में आए थे, तब वहां एक पेड़ भी लगाया था वह पेड़ आज भी है। अपनी हरिद्वार यात्रा के बारे में मुंशी प्रेमचंद्र ने विशाल भारत पत्रिका ने लिखा था। पद्म सिंह शर्मा की मृत्यु 1932 में हो गई थी। उनकी मृत्यु पर भी मुंशी प्रेमचंद ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए एक लेख लिखा था जिसका शीर्षक था ‘पद्म सिंह शर्मा के साथ तीन दिन’। मुंशी प्रेमचंद ने उनके बारे में लिखा था कि साहित्य का यह सूर्य मध्याह्न में ही अस्त हो जाएगा यह सोचा नहीं था। उन्होंने पद्म सिंह शर्मा का हिंदी लेखकों के प्रति स्नेह ऐसा बताया था जैसे मां अपने बच्चे को प्रेम करती है। मुंशी प्रेमचंद के साहित्य से अवगत कराने के लिए पंडित पद्म सिंह शर्मा ने ‘मुंशी प्रेमचंद एवं उनकी साहित्य साधना’ नाम से एक पुस्तक लिखी थी जिसमें मुंशी प्रेमचंद के बारे में विस्तार से बताया गया था। मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गांव में हुआ था और निधन आठ अक्तूबर 1936 को हुआ था।

मुंशी प्रेमचंद।- फोटो : BIJNOR

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें