शनिवार को गांव ढकौली निवासी युवक को डसा था सांप ने
नहटौर अस्पताल न लाकर झाड़-फूंक करने वालों के पास ले गए
संवाद न्यूज एजेंसी
नहटौर। शनिवार को सर्पदंश का शिकार हुए अजय कुमार (25) पुत्र रघुवीर सिंह को यदि गांव से मात्र सात किलोमीटर दूर नहटौर सीएचसी ले आते तो शायद उसे बचाया जा सकता था। परिजन उसे लेकर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक दौड़े लेकिन उसकी जिंदगी नहीं बच सकी।
अजय की मौत के 36 घंटे बाद भी परिजन उसकी सांसें लौटने की उम्मीद में यहां-वहां ले जाते रहे। तीन घंटे नलकूप के पानी की धार उसके सिर पर गिराई। सहारनपुर लेजाकर भी झाड़-फूंक कराया। अंत में थक-हारकर सर्पदंश के चार दिन बाद मंगलवार को जलालपुर गंगा घाट पर युवक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अजय शनिवार की दोपहर खेत से लौटने के बाद घर आकर सो गया था। शाम को चार बजे उठा तो उसे चक्कर आने लगे। नीम के पत्ते चबाने पर उनका स्वाद मीठा लगा तो परिजनों ने उसे अनुमान लगाया कि उसे खेत पर किसी सांप ने डस लिया है। वे उसे दौलतबाद में झाड़-फूंक करने वाले के पास ले गए। कुछ आराम हुआ तो घर ले आए। रात में फिर उसकी तबीयत बिगड़ने पर निजी अस्पताल ले गए। रविवार की रात्रि छुट्टी कराकर घर लाते समय उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने उसे गंगोड़ा में एक सपेरे को दिखाया लेकिन कोई लाभ न हुआ। इसके बाद झालू में चिकित्सक को दिखाया तो उसने अजय को मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने इसके बाद भी उम्मीद नहीं छोड़ी और सोमवार की सुबह उसकी सांसें लौटने की उम्मीद में कुएं की हौज में रखकर तीन घंटे तक उसके सिर पर तीन घंटे तक नलकूप की धार लगाई गई। इसके बाद में उसे सहारनपुर जनपद में सपेरे के पास ले गए। वहां सपेरा नहींं मिला तो उसकी पत्नी ने उपचार किया। मंगलवार की सुबह परिजन उसे गंज ले आए। वहां युवक को मृत बताते हुए उपचार करने से इन्कार कर दिया।
सर्पदंश का एकमात्र इलाज एंटी स्नेक वेनम : डॉ. आशीष
नहटौर। जागरूकता के अभाव में लोग सर्पदंश के शिकार को सरकारी अस्पताल न लाकर झाड़-फूंक वालों के पास ले जाते हैं। पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष कुमार आर्य ने बताया कि सर्पदंश का उपचार केवल एंटी स्नेक वेनम ही है। सांप के काटने पर इधर-उधर भटकना जानलेवा हो जाता है। सीएचसी में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। जितनी जल्दी हो सके मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। उनका कहना है कि यदि अजय को भी यदि समय रहते सीएचसी में भर्ती कराया जाता तो उसकी जान बच सकती थी।