‘हिंदी हमारी मां है और मां का हर दिन होता है...’
स्योहारा। हम संस्था की ओर से हिंदी सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें जिले के साथ-साथ मुंबई से भी हिंदी से जुड़ी हस्तियां शामिल र्हुइं। कार्यक्रम में कवियों और शायरों ने देर रात तक रचनाओं से खूब गुदगुदाया। वहीं, कार्यक्रम के दौरान हिंदी से जुड़े कई लोगों को सम्मानित भी किया गया।
मुरादाबाद मार्ग ग्राम बगबाड़ा स्थित मंगललिपि फार्म हाउस पर दो सत्रों में आयोजित हिंदी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, डीआईजी शलभ माथुर, डीएम बिजनौर उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह, मुरादाबाद के प्रसिद्ध चिकित्सक अनुराग अग्रवाल, समाज सेवी डॉ. मनोज वर्मा, कुंवर राणा प्रताप और मेहमान साहित्यकारों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन की अध्यक्षता यश भारती पुरस्कार से पुरस्कृत साहित्यकार माहेश्वर तिवारी, संचालन लेखक दानिश जावेद ने किया। प्रथम सत्र में हिंदी सम्मान पर साहित्यकारों ने विचार रखे। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने हिंदी भाषा को दैनिक कार्यालय के कार्यों में शामिल करने की प्राथमिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी हम सब की मातृभाषा है और मां का एक दिन नहीं होता बल्कि मां को सम्मान देने से ही व्यक्ति की पहचान बनती है। उन्होंने सुझाव दिया कि मार्ग, पार्कों के नामकरण हिंदी साहित्यकारों के नाम पर रख कर सम्मान दिया जा सकता है। माहेश्वर तिवारी नें हिंदी भाषा को सब से सरल भाषा बताते हुए लोगों से बच्चों को अंग्रेजी विद्यालयों की जगह हिंदी माध्यम विद्यालयों में शिक्षा दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। रोटेरियन डॉ. मनोज वर्मा ने बताया कि हिंदी की महत्ता को देखते हुए रोटरी अंतरराष्ट्रीय में भी हिंदी को प्रमुख स्थान दिया गया है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं से माहौल को खुशनुमा कर दिया। हास्य रस कवि प्रवीण राही नें कविता नेता सुना कर वाहवाही लुटी। मेराज बिजनौरी ने ‘जो लोग कुछ भी नहीं फिर भी उड़ते हैं हवाओं में, तुम आसमान हो फिर भी जमी पर रहते हो’ पढ़कर तालियां बटोरीं। युवा कवि चिराग शर्मा ने ‘मैं दिल की बातों में आ गया और उठाकर ले आया उसकी पायल, दिल देता रहा सदाएं चिराग रख दे चिराग रख दे पर’ खूब तालियां बजीं। फिल्म निदेशक, लेखक और पत्रकारिता से जुड़े बिजनौर निवासी दानिश जावेद ने के शेरों का लोगों ने खूब आनंद लिया। रुड़की के प्रसिद्ध शायर महशेर आफरीदी ने काफी देर तक अपनी शायरी से समा बांधे रखा। नजर बिजनौरी ने पढ़ा ‘खिलते हुए गुलाब ने शायर बना दिया, मुझको तेरे शबाब ने शायर बना दिया’ खूब सराही गई। अलीगढ़ की मशहूर शायरा मुमताज नसीम को भी लोगों ने काफी देर तक सुना।
गीतकार तुराज के आते ही बजने लगीं तालियां
मुजफ्फरनगर के प्रसिद्ध शायर 42 फिल्मों में गीत लिख चुके फिल्म गीतकार एएम तुराज के माइक पर आते ही लोगों ने तालियों से स्वागत किया। एएम तुराज ने ‘रूठा वो किसी रूह की मानिंद वदन से, एक बार जो बिछड़ा पलट कर नहीं आया’ पढ़कर महफिल में वाहवाही लूटी। युवा साहित्यकार अश्वनी विश्नोई की कविता भी सराही गई। साहित्यकारों ने समाज सेवी डाक्टर मनोज वर्मा का आभार व्यक्त किया। हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए आरएसएम डिग्री कॉलेज में पूर्व हिंदी विभाग अध्यक्ष तथा भाषा जयशंकर प्रसाद, डॉ. शंकर लाल शर्मा, कुशलपाल सिंह, डॉक्टर अनुराग अग्रवाल, डॉक्टर लिपिसैन वर्मा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख रश्मि वर्मा, राजीव वर्मा को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। शौर्य वर्मा, चौधरी फहीमुर्हमान, कृष्ण कुमार ढाका, ब्लॉक प्रमुख उज्ज्वल सिंह चौहान, डॉ. मिराजुद्दीन उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में गजल भारद्वाज मुख्य विकास अधिकारी रामपुर भी उपस्थित रहे।