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पंचायत भवन अधूरे, कैसे डिजिटल होंगे गांव

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ज्ञानपुर। ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय चलाने की मंशा धरातल पर फलीभूत होती नहीं दिख रही है। 546 ग्राम पंचायतों में 103 अभी तक पूर्ण नहीं हो सके हैं जबकि पूर्व में बने 243 पंचायत भवनों की हालत ठीक नहीं है। अभी तक 500 से अधिक सचिवालय में इंटरनेट की सुविधा भी मयस्सर नहीं हो सकी है। ऐसे में माह के अंत तक मिनी सचिवालय को संचालित कराना प्रशासन और विभाग के लिए चुनौती होगा।
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जिले के छह ब्लॉकों में 546 ग्राम पंचायत हैं। आम आदमी को गांव में ही सभी सुविधाएं मिल सके, इसलिए पंचायत भवनों को अपग्रेड किया जा रहा है। जिसके लिए शासन से 17 लाख एक पंचायत भवन निर्माण पर खर्च हो रहे हैं। विभाग का दावा है कि 546 गांवों में 243 में पहले से ही पंचायत भवन है। 303 में नए पंचायत भवन का निर्माण हो रहा है, जिसमें 103 अभी अपूर्ण हैं। हकीकत यह है कि जिन गांवों में पंचायत भवन पूर्ण होनेे का दावा किया जा रहा है वह भी आधे-अधूरे ही बन सके हैं। ज्ञानपुर के भुड़की गांव में पंचायत भवन बाहर से पूर्ण हो चुका है, लेकिन अंदर की सुविधाएं नदारद है। यह तो एक बानगी है। ऐसे कई पंचायत भवन हैं जो अधूरे ही है। अधिकतर पंचायत भवनों तक इंटरनेट की सुविधा नहीं है। ऐसे में समय से मिनी सचिवालय के शुरू होने का सपना मुश्किल दिख रहा है।
पंचायत भवनों की स्थिति एक नजर
कुल ग्राम पंचायतों की संख्या -546
पूर्व में निर्मित पंचायत भवन -243
नए निर्माण में बन रहे -303
नए निर्माण वाले अधूरे -103
पंचायत भवन निर्माण हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। 303 नए भवन बन रहे हैं, जिनमें 103 का काम अधूरा है। पूरा कराया जा रहा है। जिन ग्राम सभाओं में पंचायत भवन नहीं हैं, उन्हें अगले वित्तीय वर्ष में निर्माण के लिए लिया जाएगा। जहां आधे-अधूरे हैं, वहां सचिव से जवाब लिया जाएगा। 24 अक्तूबर तक सभी को कम से कम एक सचिवालय शुरू कराने की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसा न होने पर उनका वेतन रोका जाएगा। - बालेशधर द्विवेदी, डीपीआरओ
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