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खराब पड़े हैं हैंडपंप, नहीं डाली जा सकी जलापूर्ति की पाइप लाइन

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उत्तर रेलवे के प्रमुख स्टेशन सुरियावां पर तीन वर्ष बाद भी पेयजल की सुविधा सुचारु नहीं हो सकी है। यात्री महंगे दर पर बोतल का पानी दुकानों से खरीद कर प्यास बुझाने के लिए विवश हैं। शिकायत दर्ज कराने पर रेल प्रशासन मात्र लिखा पढ़ी तक सीमित रह जाता है। इससे यात्रियों की समस्या बढ़ गई है।
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यात्री अवधेश वैश्य ने बताया कि चार वर्ष पूर्व जंघई-वाराणसी रेल खंड को दोहरीकरण योजना में शामिल कर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। दो वर्ष तक ट्रेनों का संचालन बंद होने से स्टेशन पर सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन अनलॉक में अनारक्षित और आरक्षित विशेष ट्रेनों को चलाने की हरी झंडी मिलते ही यात्री प्रयागराज, वाराणसी, जंघई, फाफामऊ, लोहता, परसीपुर समेत नई दिल्ली, मुंबई आदि महानगरों की यात्रा को महत्व देने लगे हैं। प्लेटफार्म नंबर एक-दो पर दो से तीन की संख्या में हैंडपंप लगे हैं, जो खराब होने के चलते पानी देने में असमर्थ हैं। डा.चंद्रेश मौर्य ने कहा कि दोहरीकरण करते समय दशक पूर्व स्थापित पेयजल टंकियां ध्वस्त कर दी गईं। पंप लगाकर तीन वर्ष बाद भी पाइप लाइन नहीं बिछाई जा सकी है। यात्री अश्वनी कुमार, सरस कुमार, आबिद अली, रमाशंकर ने कहा कि प्यास लगने पर 20 से 25 रुपये बोतल पानी खरीद कर ही प्यास बुझा पाते हैं। व्यापार मंडल के अध्यक्ष शेषधन गुप्ता, अजय मोदनवाल, शफीक अंसारी, अश्वनी साहू ने लखनऊ रेल मंडल प्रशासन को आगाह किया कि समस्या का समाधान न होने पर विरोध-प्रदर्शन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। डीसीएम उत्तर रेलवे जगतोष कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान न होने से यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थलीय निरीक्षण कराकर पेयजल की समस्या दूर करा दी जाएगी।
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