साधन सहकारी समिति कैयर मऊ में तीन दिन पहले ही डीएपी समाप्त हो गई। यहां के सचिव ने 12 टन की डिमांग भेजी है। हालांकि यहां यूरिया पर्याप्त मात्रा में है। यही हाल किसान सेवा सहकारी समिति औराई, साधन सहकारी समिति खमरिया की है। यहां भी चार-पांच दिन पहले से डीएपी नहीं है। ऊंज क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों पर भी डीएपी की भारी कमी है। यहां के रोही और रमईपुर साधन सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं है।
नथुआं के किसान छविनाथ यादव ने बताया कि यूरिया तो मिल जा रही है, लेकिन डीएपी के लिए हम लोगों को प्राइवेट दुकानों पर जाना पड़ रहा है। शिवसागर शुक्ल का कहना है कि जब किसान को डीएपी खाद की जरूरत होती है तो हर साल रोना होता है। करेऊआ के राजकुमार यादव का कहना है कि चार दिन से सब काम छोड़कर सुबह व शाम खाद के लिए समितियों का चक्कर लगा रहे हैं। मनोज कुमार प्रजापति निवासी जाठी ने भी खाद की समस्या बताई। हमीदपट्टी के दयाशंकर शुक्ल ने कहा कि खाद न मिलने से दिक्कत हो रही है। उधर, सहकारिता विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में रबी सीजन के लिए करीब 10 हजार एमटी डीएपी का लक्ष्य होता है। सरकारी और प्राइवेट दोनों मिलाकर अब तक करीब पांच हजार एमटी से कुछ ज्यादा डीएपी मिली है। बाकी के लिए डिमांड भेजी गई है। एआर कोऑपरेटिव राघवेंद्र शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में जिले की 30 समितियों में से महज गोपीगंज में डीएपी की उपलब्धता है। उन्होंने बताया कि केवल 50 एमटी डीएपी बची है। हालांकि दो दिन के भीतर ही डीएपी आने वाली है। पांच सौ एमटी की आवक से समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।
उधर, जिले में रबी सीजन में फसलों की बुआई का लक्ष्य करीब 50 हजार हेक्टेयर का है। जिला कृषि अधिकारी एके प्रजापति ने बताया कि अभी 36 हजार हेक्टेयर के करीब में बुआई हो चुकी है। कुछ किसान अभी बुआई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डीएपी की अभी जरूरत है। डीएपी में नाइट्रोजन और फास्फोरस होता है। इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं। इसका उपयोग न करने से पौधे कमजोर होते हैं और विकास नहीं होने से उत्पादन पर असर पड़ता है। वैसे खाद की कमी एक-दो दिन ही दूर हो जाएगी। रैक लग गई है।