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परिचारक निलंबित, सचिव के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति

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ज्ञानपुर। सुरियावां विकास खंड के पांच ग्राम पंचायतों में 13.61 लाख घोटाले के मामले में सचिव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। घोटाले से जुड़ी फाइल रिसीव करने वाले परिचारक राजू को डीपीआरओ बालेशधर द्विवेदी ने निलंबित कर दिया। ब्लॉक से दूसरी प्रति मंगाकर सचिव के खिलाफ डीएम को पत्र लिखा है।
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सुरियावां ब्लॉक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी प्रदीप कुमार बिंद ने स्थानांतरित होने के पहले कई गांवों में बगैर काम कराए ही भुगतान कर दिया था। इसकी रिपोर्ट नई तैनाती के बाद सचिव ने तत्कालीन खंड विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी को दी। खंड विकास अधिकारी ने मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को तीन अगस्त को सौंप दी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्राम पंचायत अधिकारी प्रदीप कुमार बिंद ने 13 लाख 61 हजार 787 रुपये अधिक भुगतान कर दिया। आरोपित सचिव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की संस्तुति की गई है। सीडीओ भानु प्रताप सिंह ने जांच रिपोर्ट को डीपीआरओ को कार्रवाई के लिए भेज दिया। कार्रवाई करने के बजाए पूरी जांच रिपोर्ट की फाइल ही गायब हो गई। मामले ने तूल पकड़ा तो डीपीआरओ ने सीडीओ कार्यालय से फाइल रिसीव करने वाले परिचारक राजू को निलंबित कर दिया। डीएम के सख्त तेवर के बाद डीपीआरओ ने वरिष्ठ लिपिक रामायण त्रिपाठी को भेजकर सुरियावां ब्लॉक में रखी रिपोर्ट की दूसरी प्रति को मंगाया। डीपीआरओ ने बताया कि ब्लॉक से दूसरी रिपोर्ट मंगाकर डीएम को कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
इन गांवों में पकड़ी गई थी धांधली
ज्ञानपुर। तत्कालीन खंड विकास अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार महदेपुर में सामुदायिक शौचालय, दो आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण में 4.09 लाख, महजूदा गांव में सोलर वाटर पंप निर्माण में 65 हजार, कुसौड़ा में सोलर वाटर पंप और पंचायत भवन निर्माण में 3.51 लाख, कैड़ा में सोलर वाटर पंप और सामुदायिक शौचालय निर्माण में 2.82 लाख, मनापुर में सोलर वाटर पंप निर्माण में 1.80 लाख और खरगपुर में बगैर निर्माण कराए ही 90 हजार का गबन किया गया।
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इनसेट
निलंबित सचिव पर दर्ज होगा मुकदमा, दिया निर्देश
ज्ञानपुर। डीघ विकास खंड के तुलसीपट्टी के निलंबित सचिव नीतीश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश हो गया है। डीपीआरओ बालेशधर द्विवेदी ने सहायक विकास अधिकारी डीघ को पत्र लिखा है। गांव के जय कुमार तिवारी ने मुख्यमंत्री को आईजीआरएस पर प्रार्थना पत्र देकर गांव में गड़बड़ी की शिकायत की थी। जिसको संज्ञान में लेकर जांच अधिकारी नामित हुए, लेकिन सचिव शिकायत से जुड़े अभिलेख नहीं दे रहे थे। मामला मुख्यमंत्री से जुड़ने के कारण सचिव को निलंबित कर दिया गया। अब डीपीआरओ ने सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
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