दिनभर होती रहीं तैयारियां, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज
साधु और गृहस्थ एक साथ रखेंगे व्रत, बाजारों में होती रही खरीदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व सोमवार को नगर से लेकर गांव तक घर-घर मनाया जाएगा। इसे देखते रविवार को लोग दिनभर तैयारियां करते दिखे। बाजारों में लोग खरीदारी करते दिखे। इस बार वैष्णव यानी साधु और गृहस्थ एक ही दिन व्रत रखेंगे।
ज्योतिषियों के मुताबिक, भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृषभ राशि में चंद्रमा, अर्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी तिथि ये सभी पर्व को विशेष फलदायी बना रहे हैं। जन्माष्टमी व्रत रखने वाले 31 अगस्त को सुबह नौ बजकर 44 मिनट बाद व्रत का पारण कर सकते हैं।
शहर के मंदिरों को फूलमालाओं, रंग-बिरंगी लाइटों आदि से सजाकर भव्य रूप दे दिया गया। शहर के कटरा, महरीखांवा मोहल्ला, गांधीनगर, रोडवेज, रेलवे स्टेशन के निकट, मंगल बाजार, नई बाजार, पांडेय बाजार सहित प्रमुख मोहल्लों में जन्माष्टमी मनाई जाएगी और आकर्षक झांकियां सजाई जाएंगी। मंडलीय कारागार के बाहर भी जन्मोत्सव मनेगा।
खीरे के दाम बढ़े
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान खीरे का विशेष महत्व है। इस कारण जन्माष्टमी के दिन खीरे के दाम भी आसमान छूने लगते हैं। रविवार को ऐसा ही हुआ। कुछ दिनों पहले तक 20 रुपये किलो बिकने वाला खीरा रविवार को 50 से 60 रुपया किलो बिका। सोमवार को जन्माष्टमी पर इसके दाम और भी बढ़ने के आसार हैं।
ऐसे करें व्रत पूजन
ज्योतिर्विद पंडित सतीश मणि त्रिपाठी के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रात: काल स्नान आदि के बाद पूजन-अर्चन कर व्रत का संकल्प लें। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित कर झांकी सजाएं। विधि-विधान से पूजन करें। पूजन में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी, इन सबका नाम क्रमश: लेना चाहिए। मध्य रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव मनाएं। अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था इस कारण रात में ही भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को नहलाया जाता है और उन्हें नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इस दिन बाल गोपाल को पालने में झुलाने की भी परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि जन्माष्टमी का व्रत करने से व्रती को बाल कृष्ण जैसी संतान प्राप्त होती है।
भगवान कृष्ण का मूल मंत्र
‘कृं कृष्णाय नम:’
धन-धान्य में वृद्धि करने वाला मंत्र
‘क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नम:’
मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए मंत्र
‘ॐ नमो भगवते नन्दपुत्राय आनन्दवपुषे गोपीजनवल्लभाय स्वाहा’