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आईजी की निगरानी में चलेगा आपरेशन तफ्तीश

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आईजी की निगरानी में चलेगा ‘ऑपरेशन तफ्तीश’
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रेंज में काफी समय से लंबित हैं 89 मुकदमों की विवेचना
बस्ती में 37, संतकबीरनगर 31, सिद्धार्थनगर में 21
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। परशुरामपुर के छह वर्षीय आंचल हत्याकांड, नगर थानाक्षेत्र के 18 माह की ईशू हत्याकांड सरीखे काफी पुराने मुकदमों की विवेचना पुलिस के लिए लंबे समय से गले की हड्डी बनी हुई है। संगीन अपराध में बेहतर परिणाम आने के बावजूद हर बार समीक्षा के दौरान इन मुकदमों में शून्य प्रगति होने से अधिकारियों का मन खिन्न हो जाता है। आईजी एके राय के मुताबिक इसके लिए ऑपरेशन तफ्तीश शुरू किया जाएगा। ताकि काफी लंबे समय से लंबित विवेचनाओं में प्रगति हो सके। इसके लिए पुरानी विवेचनाओं की सूची तैयार की जाएगी और उन्हें प्राथमिकताओं के तहत निपटाया जाएगा। आईजी के मुताबिक प्रथम स्तर पर रेंज के बस्ती में 37, संतकबीरनगर 31, सिद्धार्थनगर में 21 मुकदमों की तफ्तीश पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। दरअसल इस विसंगति से निजात पाने के लिए एडीजी अखिल कुमार ने बस्ती रेंज समेत पूरे जोन के सभी जनपदों को यह आदेश दिया है। कहा गया है कि पुलिस अफसरों की निगरानी में लंबित मामलों की विवेचनाएं जल्द पूरी की जाएं। हकीकत यह है कि हत्या, लूट, डकैती, चोरी, दुष्कर्म जैसी तमाम घटनाओं में पुलिस त्वरित गति से पर्दाफाश कर देती है। उनकी जल्द से जल्द चार्जशीट भी न्यायालय को प्रस्तुत कर दी जाती है लेकिन साइबर काइम, ऑनलाइन/ऑफ लाइन जालसाजी, आवश्यक वस्तु अधिनियम, विद्युत अधिनियम आदि अन्य केस जिसकी विवेचना काफी समय से लंबित होने पर पुलिस पर सवाल उठते हैं। ऐसे मामलों को निपटाने के लिए एडीजी ने पहल की है।
विवेचनाओं में देरी का कारण
मुकदमा दर्ज कराने वाले अथवा आरोपित के गैर प्रांत या दूर का होने की वजह से बयान आदि में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी है। आत्महत्या या जहरीला पदार्थ खाकर मौत के मामलों में पुलिस को फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए काफी चक्कर काटना पड़ता है।
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फर्जी हस्ताक्षर बनाने, नकली स्टैंप आदि कागजी जालसाजी धोखाधड़ी के मामलों में विवेचक काफी उलझा रहता है। पर्याप्त साक्ष्य और तकनीकी आधार नहीं मिलने पर उसे रिपोर्ट के लिए संबंधित प्रयोगशाला या जांच एजेंसी की पहल का इंतजार करना पड़ता है।
कई बार अयोग्य विवेचक को तफ्तीश आवंटित होने की वजह से भी काफी देर होती है। इस तरह के मामले सबसे ज्यादा आईटी एक्ट से जुड़े होते हैं। पूरी तरह से सूचना तकनीक से जुड़े होने के ऐसे मामलों में यदि विवेचक आईटी दक्ष नहीं है तो उसे केस के निष्कर्ष तक पहुंचने में काफी देर होती है।
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उलझा है ईशू और आंचल हत्याकांड
छह वर्ष की मासूम आंचल की 13 दिसंबर 2020 को हत्या कर दी गई थी। परशुरामपुर थानाक्षेत्र के इस मामले में घर से कुछ दूरी पर गन्ने के खेत में उसकी लाश मिली थी। इसी तरह नगर थानाक्षेत्र के प्रसादपुर की 18 माह की ईशू की घर के भीतर गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के दिन से ही उसकी मां दीपमाला भी लापता है। इसमें एक मुकदमा हत्या का दर्ज है जबकि दूसरा मुकदमा दीपमाला के मायके वालों ने उसके ससुरालियों पर इस आरोप में दर्ज कराया है कि दहेज के लिए उसकी दीपमाला की भी हत्या करके लाश गुम कर दी गई।
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