मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन के लिए बाहर से मंगवाई जा रही दवा
बस्ती। सरकार अस्पतालों में मरीजों का निशुल्क इलाज व दवा उपलब्ध कराने के लिए कसरत कर रही है। लेकिन, जनपद के मेडिकल कॉलेज पर इस निर्देश का कोई खास असर नहीं है। लिहाजा आपरेशन के लिए मरीजों से बाहर से दवा मंगवाई जा रही है। ऐसी स्थिति तब पैदा हुई है जब करीब एक महीने से मेडिकल कॉलेज में उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेेशन की ओर से दवा की आपूर्ति बंद है।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली की स्थिति दिन-ब- दिन बिगड़ती जा रही है। यहां अन्य व्यवस्था पर तो उंगली उठती ही रहती है। अब दवा को लेकर कॉलेज प्रशासन कटघरे में है। क्योंकि यहां ओपीडी व भर्ती मरीजों को अधिकांश दवाएं बाहर से ही लेनी पड़ रही हैं। यही नहीं, आपरेशन के लिए भी मरीज बाहर अच्छी खासी रकम खर्च कर दवा का इंतजाम करते हैं। जिम्मेदार दवाओं की कमी का ठीकरा कारपोरेशन पर फोड़ते हैं। कहते हैं कि मानक के अनुसार दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने में कारपोरेशन फेल हो गया है। लोगों का कहना है कि जब मेडिकल कॉलेज स्वायत्त संस्था है तो फिर वह नियमानुसार दवाएं क्यों नहीं खरीद पा रहा है। जरूरत की दवाएं न होने के कारण कॉलेज प्रशासन पर सवाल उठने लगे है। अब लोगों का मोह मेडिकल कॉलेज से भंग होने लगा है।
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बोले, तीमारदार
आपरेशन के लिए 64 वर्षीय पिता को लेकर आए राम निहोर ने कहा कि आज उनका आपरेशन है। यहां तो निजी अस्पतालों से ज्यादा लूट है। क्योंकि सभी दवाएं बाहर से मंगाई जा रही हैं। अब तक करीब चार हजार से अधिक की दवा मंगाई जा चुकी है। कैली केवल कहने को सरकारी है। वैसे तो यहां के हालत अच्छे नहीं हैं। दवा व आपरेशन के लिए प्रयुक्त होने वाली सामग्री तक चिकित्सक बाहर से मंगाते हैं। एक अन्य तीमारदार जितेंद्र कुमार ने कहा कि ओपेक चिकित्सालय कैली अब केवल कागजों में ही सरकारी अस्पताल रह गया है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद इसकी स्थिति ठीक नहीं है। न तो यहां दवा है और न चिकित्सक। अपनी मां का आपरेशन कराने पहुंचे जितेंद्र कहते हैं कि भर्ती कराए तीन दिन बीत गया है। अब तक करीब साढ़े तीन हजार रुपये की दवा बाहर से ला चुके हैं।
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यहां जरूरत की दवाएं नहीं, डिमांड भेजी गई है : प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि शासन का निर्देश उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन से अस्सी फीसदी दवा लेने का है। जबकि बीस प्रतिशत का अधिकार कॉलेज को है। कारपोरेशन ने दवा नहीं भेजी इसलिए यह स्थिति उत्पन्न हुई है। यहां जरूरत की दवाएं नहीं हैं। चिकित्सक मजबूरी में बाहर से आपरेशन व ओपीडी में बाहर से दवाएं लिख रहे हैं। डिमांड भेजी गई है।