बरेली। वैसे तो हर प्रेम में चुनौतियां होती हैं, मगर सदियों में कोई ही प्रेम कहानी शास्त्रीयता की अथाह गहराइयों तक पहुंच पाती है। मृच्छकटिकम् भी एक ऐसी ही अनूठी कहानी है। जो शास्त्रीयता की गराइयों तक पहुंचती है। भारतीय शास्त्रीय रंगमंच के तमाम तकाजों और उसूलों पर खरी उतरती नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से यह बात एक बार फिर सच साबित हुई। राज्य नाट्य समारोह में प्रयागराज से आए कोलाज कल्चरल सोसाइटी के कलाकारों ने अपनी प्रतिभा को दर्शकों के सामने पेश किया।
उत्तर प्रदेश राज्य नाटक अकादमी की ओर से दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के संयोजन में इन दिनों विंडरमेयर में राज्य नाट्य समारोह चल रहा है। इसमें चौथे रोज ‘मृच्छकटिकम्’ नाटक की प्रस्तुति कर प्रेम और राजनीतिक जटिलताओं को दर्शाया गया। राजा शूद्रक के लिखे संस्कृत नाटक में कहानी से बिना छेड़छाड़ किए आधुनिक उपकरणों का बेहतर ढंग से प्रयोग किया गया। कुल मिलाकर यह नाटक प्रेम, षडयंत्र, धूर्तता, चोरी और न्याय व्यवस्था के दोष से रुबरू कराता है। धन, संपदा, सत्ता, मद, मोह, और नश्वर शरीर को महज भ्रम बताते हुए यह संदेश देता है कि मिट्टी में मिल जाना ही परम सत्य है। नाटक की परिकल्पाना डॉ. विधु दास और निर्देशन आकांक्षा वर्मा का रहा। नाटक में राकेश यादव, आशीष कांत, अभिषेक मिश्रा, महेंद्र कन्नौजिया, कुंवर जी रॉकी, मनीष तिवारी, गौरव शर्मा ने शानदार अभिनय किया।
इस मौके पर साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी, अकादमी की नाट्य सर्वेक्षक शैलजा कांत, दया दृष्टि के चेयरमैन डॉ. बृजेश्वर सिंह आदि मौजूद रहे। मीडिया प्रभारी मुशाहिद रफत के अनुसार शुक्रवार को आजमगढ़ की संस्था सूत्रधार का नाटक ‘बोंटू आहिर’ का मंचन शाम 5:30 से किया जाएगा।