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सपा में घमासान: सलीम शेरवानी ने क्यों दिया राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा, 2009 से शुरू हुई थी यह कहानी

Mon, 19 Feb 2024 11:05 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

लोकसभा चुनाव से पहले सपा में घमासान मचा हुआ है। स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद रविवार को सलीम शेरवानी ने सपा के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। वह बदायूं लोकसभा सीट से पांच बार सांसद रहे हैं। वह सपा के टिकट पर लगातार चार बार चुनाव जीते, जबकि पहली बार कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने थे। 
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सलीम शेरवानी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव से ऐन पहले बदायूं से पांच बार के सांसद और पूर्व केंद्रीय विदेशी राज्यमंत्री सलीम शेरवानी ने रविवार को राष्ट्रीय महासचिव पद छोड़कर सपा को झटका दिया। सलीम शेरवानी और सपा के बीच 2009 से ही अदावत चल रही है। दिल्ली में इस घोषणा के दौरान उनके साथ पूर्व विधायक आबिद रजा भी रहे। 

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दरअसल, वह सपा से राज्यसभा जाना चाहते थे। उनसे वादा भी किया गया था। सपा ने तीन राज्यसभा प्रत्याशियों के नाम का एलान किया तो उनका नाम नहीं था। इसके बाद से ही शेरवानी की ओर से कोई कदम उठाने के कयास लगाए जा रहे थे। 

सलीम शेरवानी पहली बार बदायूं लोकसभा सीट से 1984 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। 1989 में उन्होंने एटा और 1991 में फिर बदायूं लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 1996 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर सपा का दामन थाम लिया और 1996, 98, 99 और 2004 में लगातार सपा से बदायूं के सांसद चुने गए। 2009 में सपा ने उनका टिकट काटकर धर्मेद्र यादव को प्रत्याशी बनाया। इस पर शेरवानी ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा। वह चुनाव हार गए। 
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सपा को बड़ा झटका: बदायूं से पांच बार के सांसद रहे सलीम शेरवानी ने छोड़ा पद, अखिलेश पर लगाया ये आरोप

इसके बाद वह बदायूं और आंवला लोकसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते आ रहे थे। फिर से सपा में आने पर उनसे राज्यसभा भेजने का वादा किया गया था। 2017 और 2022 के बाद इस बार भी सपा ने उनको राज्यसभा प्रत्याशी नहीं बनाया। शेरवानी को उम्मीद थी कि पीडीए यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक गठजोड़ के तहत सपा उनको राज्यसभा प्रत्याशी बनाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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2022 में बेटे के लिए शेखूपुर से लड़ाना चाहते थे
सलीम शेरवानी 2022 में अपने बेटे शाद शेरवानी को शेखूपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाना चाहते थे। बदायूं सीट से वह आबिद रजा को टिकट दिलाना चाहते थे, लेकिन सपा ने शेखूपुर से हिमांशु यादव और शहर सीट से हाजी रईस को प्रत्याशी घोषित कर दिया।  उनको इसके बाद राज्यसभा की उम्मीद थी। सपा सुप्रीमो ने उनसे वादा भी किया था। फरवरी को राज्यसभा के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शेरवानी ने सपा का राष्ट्रीय महासचिव पद छोड़ने का मन बना लिया था।
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