बदायूं। शहर के श्री राम सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की छात्राएं सोमवार को नए अनुभव की साक्षी बनीं। सिविल लाइंस थाने पहुंचीं छात्राओं को एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने पुलिस के कामकाज का तरीका बताया। छात्रा सिमरन साहू को उन्होंने थाना प्रभारी की कुर्सी पर बैठाया। महिला पुलिसकर्मियों ने हेल्प डेस्क पर शिकायत और निवारण के तरीके बताए।
अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम के तहत जिले में छात्राओं को थाने का दौरा कराया गया। सोमवार दोपहर मीराजी चौकी स्थित इस विद्यालय की छात्राएं शिक्षक राजकुमार सेंगर के साथ सिविल लाइंस थाने पहुंचीं। 30 में अधिकतर कक्षा छह से आठ की छात्राएं थीं। यहां थाना प्रभारी आरके तिवारी व महिला पुलिसकर्मियों रेशू रानी व रंजना ने छात्राओं का स्वागत किया। महिला हेल्प डेस्क के स्टाफ ने छात्राओं से संवाद शुरू किया तो वे हिचकने लगीं।
इस दौरान यहां पहुंचे सीओ सिटी आलोक मिश्रा ने बताया कि घबराने की जरूरत नहीं है। इन्हें पुलिस न समझकर बड़ी बहन की तरह बात करो। छात्राओं ने हिचक तोड़ी और एफआईआर दर्ज करने के तरीके से लेकर अन्य जानकारियां लीं।
इस बीच एसएसपी डॉ. ओपी सिंह व एसपी देहात सिद्धार्थ वर्मा थाने आ गए। अधिकारियों ने छात्राओं को थाने के सभी कक्ष दिखाए। थाना कार्यालय में किस तरह काम किया जाता है, सीसीटीएनएस कक्ष में सूचनाओं का संकलन व एफआईआर दर्ज करने, शिकायत डेस्क आदि से परिचित कराया। एसएसपी ने पूछा कि आपमें सबसे छोटी बच्ची कौन है। जवाब में सिमरन साहू आगे आईं। एसएसपी ने सिमरन को थाना प्रभारी की कुर्सी पर बैठाया। फिर उस पद की जिम्मेदारी बताई। बताया कि छोटे मामलों की शिकायत थाना प्रभारी मौके पर ही निपटाते हैं और बड़े मामलों में रिपोर्ट दर्ज करके गिरफ्तारी की जाती है। छात्राओं के सवालों के जवाब भी अधिकारियों ने बखूबी दिए। उन्हें हेल्पलाइन व अन्य महत्वपूर्ण नंबरों के बारे में बताया और कहा कि किसी भी जरूरत पर तत्काल पुलिस की मदद लें। बाद में थाना प्रभारी ने छात्राओं को जलपान कराकर विदा किया।
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छात्राओं ने साझा किए अनुभव
आज हम पहली बार थाने में आए हैं। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। सभी ने बहुत अच्छे से बात की। हमसे पूछ रहे थे कि कौन से क्लास में पढ़ते हो। मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही है।
- साक्षी जाधव
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हम तो घर से स्कूल ही आते-जाते हैं। कहीं जाने का मौका नहीं मिलता। घर जाते हैं तो पढ़ाई में लग जाते हैं। पहली बार थाने आकर कुछ नया देखने को मिला है। कुछ सीखने को मिला। यहां सब लोगों का व्यवहार अच्छा लगा।
- यक्षिता बघेल
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थाने में पुलिस वाली मैडम बहुत अच्छे तरीके से बात कर रहीं थीं। वह हमें महिला हेल्प डेस्क के अंदर ले गईं। उन्होंने वहां हमें कंप्यूटर दिखाया जिसमें रिपोर्ट लिखी जाती है। हमें बताया कि यहां पर महिलाओं से संबंधित समस्याओं को सुना जाता है।
- मानसी पटेल
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एसएसपी सर सभी बच्चों से बड़े प्यार से बात कर रहे थे। उन्होंने पूरा थाना घुमाया। हमें एक-एक जानकारी दी। हमें बताया कि कहां रिपोर्ट दर्ज होती है। हमने थाने की हवालात देखी जिसमें झगड़ा करने वालों को बंद रखा जाता है।
- शिवांगी सोलंकी
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एसपी देहात ने बताई संतरी की जिम्मेदारी
एसपी देहात सिद्धार्थ वर्मा ने छात्राओं को संतरी की जिम्मेदारियां बताईं। उस दौरान एक महिला कांस्टेबल संतरी रूप में तैनात थी। एसपी देहात ने बताया कि थाने की पुलिस अपने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखती है लेकिन थाने की सुरक्षा संतरी के हाथ में होती है। थाने में कौन आ रहा है और कौन जा रहा है। ये सब संतरी देखता है।
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बेटियों को इन सवालों के मिले जवाब
सवाल : एफआईआर कैसे दर्ज होती है?
जवाब : पीड़ित को प्रार्थना पत्र देना पड़ता है जिसे तहरीर भी कहते हैं। सामान्य मामलों में एनसीआर लिखी जाती है, बड़े मामलों में एनसीआर को ही एफआईआर में बदल लेते हैं या सीधे एफआईआर होती है। इसमें दोष मिलने पर चार्जशीट वर्ना एफआर लगाई जाती है।
सवाल : आरोपी को कहां रखा जाता है?
जवाब : आरोपी को थाने की हवालात में रखते हैं। अधिकतम 24 घंटे तक यहां किसी को रखा जा सकता है। इस अवधि में उसे कोर्ट में पेश करना होता है। कोर्ट के निर्देश पर उसे जेल भेजते हैं या उसे जमानत मिल जाती है।
सवाल : हम अपनी शिकायत पर कार्रवाई कैसे पता कर सकते हैं?
जवाब : पोर्टल वाली शिकायतों में निस्तारण की स्थिति घर बैठकर भी इंटरनेट के जरिए देखी जा सकती है। एफआईआर की विवेचना को समय-समय पर कोर्ट में दाखिल किया जाता है।
सवाल : हमें कोई दिक्कत हो तो तत्काल पुलिस की मदद कैसे लें?
जवाब : यूपी 112 नंबर इस समय हर समस्या का हल है। पुलिस की मदद के साथ ही फायर ब्रिगेड या स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी इसी नंबर पर बताई जा सकती हैं। महिला अपराधों के लिए 1090 नंबर भी लगा सकते हैं। सभी नंबर टोल फ्री हैं।
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श्रीराम सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सिविल लाइंस थाने का भ्रमण किया। उन्हें कई जानकारियां दी गईं और उनके सवालों के जवाब भी दिए गए। अमर उजाला की यह बेहतर पहल है।
- डॉ. ओपी सिंह, एसएसपी