शाहजहांपुर। वह अकेली थी, उनका यहां कोई सहारा नहीं था, पर उसमें अपनी प्रतिभा को दिखाने का जुनून सवार था। रंगकर्म की दीवानगी ने उन्हें अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। वह जनपद में थियेटर का ककहरा सीखने के लिए आ गईं। आगरा, गुरुग्राम और झारखंड समेत कई जगहों की महिला कलाकार यहां अभिनय की बारीकियों को सीखने के लिए आई थीं। इनमें से कई का चयन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में हो चुका है। महिला रंगकर्मियों का कहना है कि शहर के रंगकर्म की चर्चा दूर-दूर तक फैली है।
आगरा से आई मन्नी, नौकरी कर चलाया खर्च
आगरा के राजपुर चुंगी निवासी मुकेश चंद्र की बेटी मन्नी शर्मा को रंगमंच पर अभिनय का शौक था। उन्होंने जनपद के रंगकर्म के बारे में बहुत सुना था। 2016 में मन्नी शर्मा यहां आईं। उनके सामने अभिव्यक्ति नाट्य मंच के सचिव शमीम आजाद ने शर्त रखी कि वह अपने रुपये से ही रंगकर्म को सीखेंगी। इसके बाद मन्नी ने डॉन एंड डोना स्कूल में आर्ट एंड क्राफ्ट टीचर की नौकरी ज्वाइन की। उसके बाद शमीम आजाद के निर्देशन में विरासत, कह रैदास खलास...और गज फुट इंच नाटक में अभिनय की छाप छोड़ी। इस बीच एनएसडी ओर बीएनए की तैयारी भी जारी रखी।
अदिति ने थियेटर ककहरा सीखने गुरुग्राम को छोड़ा
गुरुग्राम के सेक्टर 14 निवासी अदिति आर्या एनएसडी के हर बैच में जनपद के एक व्यक्ति का नाम देखती थीं। उनमें जिज्ञासा थी कि कुछ तो है शाहजहांपुर के थियेटर में, इसलिए वह यहां आ गईं। अदिति बताती हैं कि शालू यादव, तसब्बर अली, विवेक, नेहपाल गौतम जैसी कलाकार एनएसडी में देखे। 2013 में रंगकर्म की बारीकियां सीखने के लिए यहां आईं थीं। अभिव्यक्ति नाट्य मंच के बैनर तले स्पार्टकस नाटक का मंचन किया था। उसके बाद एनएसडी में चयन हो गया। अदिति के मुताबिक गांधी भवन के मंच पर बहुत कुछ सीखा। शाहजहांपुर के रंगकर्म में हर चीज में निखार लाया जाता है।
शिमला में देखी रंगकर्मियों की प्रस्तुति तो हैरत में पड़ी प्रिया
झारखंड के जमशेदपुर जिले के आदित्यपुर निवासी प्रिया यादव कक्षा 11 की छात्रा हैं। प्रिया वहां की पथ संस्था से जुड़ी थीं। उन्होंने शिमला में ऑल इंडिया प्रतियोगिता में फ्रीडम आर्ट एकेडमी सोसायटी में जनपद के रंगकर्मियों की प्रस्तुति देखी तो हैरत में पड़ गईं। फ्रीडम आर्ट के संस्थापक अतीक अहमद से मुलाकात कर रंगकर्म सीखने की इच्छा व्यक्त की। वह 2019 में शहर में आ गईं। तब से वह यहीं रहकर अतीक अहमद के निर्देशन में नाटक कर रही हैं। प्रिया ने बताया कि वह अभी तक उजबक राजा तीन डकैत, ए काइंड ऑफ प्रेग्नेंसी नाटक में मुख्य किरदार निभा चुकी हैं। कई में करना बाकी है।
हरदोई छोड़कर दीदी के पास आकर रहने लगी शिल्पी
पड़ोसी जिले हरदोई की रहने वाली शिल्पी वर्मा में रंगकर्म करने का काफी जुनून सवार है। दीदी के घर मेहमानी में आने पर एक बार नाटक देखा तो खुद रंगकर्मी बनने की ठान ली। वह 2018 में हरदोई से यहां आ गई और अपनी दीदी के पास रहने लगी हैं। जीएफ कॉलेज में बीए में प्रवेश ले लिया। इस बीच फ्रीडम आर्ट एकेडमी से जुड़कर उसने अरे शरीफ लोग, कगार की आग, इंतजार आदि नाटकों में रोल कर चर्चा में आईं। शिल्पी वर्मा ने बताया कि उसका सपना था कि वह स्टेज पर अपनी प्रस्तुति दें। यहां के रंगकर्मियों में काफी प्रतिभा है।
अदिति आर्या- फोटो : SHAHJAHANPUR
शिल्पी वर्मा- फोटो : SHAHJAHANPUR
प्रिया- फोटो : SHAHJAHANPUR