घायल गोवंश को लगा कृत्रिम पैर
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि एचडीपीई प्लास्टिक का सर्वाधिक मजबूत स्वरूप है। इसका प्रयोग करने की वजह थी कि बड़े पशुओं का भार अधिक होता है। ऐसे में कृत्रिम पैर पशु का भार वहन कर सके और बाद में उन्हें किसी तरह से कोई दिक्कत न हो। धातु का प्रयोग करने से जंग लगने से अन्य रोग और संबंधित धातु से घाव होने की आशंका रहती है। एचडीपीई मंगाकर उसे 185 डिग्री तापतान में पिघलाकर पैरों का आकार दिया गया।
हादसे में घायल गोवंश को लगा कृत्रिम पैर
वैज्ञानिक डॉ. रोहित के मुताबिक पिछले दिनों बरेली शहर के गणेश नगर मोहल्ले के रहने वाले प्रियांशु पाठक ने हादसे में घायल एक गोवंश को भर्ती कराया था। घाव बेहद गंभीर था और पांव सड़ रहा था। लिहाजा, उसे बचाने के लिए पीछे की ओर का एक बायां पैर काटना पड़ा।
कृत्रिम पैर को लगाने के बाद घुटने के पास और खुर के पास सॉकेट से फंसाया गया। चलाकर देखा गया तो स्थिति ठीक मिली। लेकिर गोवंश कृत्रिम पैर से तालमेल नहीं बिठा पा रही थी। ऐसे में करीब 15 दिनों से प्रशिक्षित किया जा रहा था। लिहाजा, अब गोवंश कृत्रिम पैर के साथ चलने लगा है।