देश में ऐसे मामले बहुत कम
डॉ. राजीव पांडे का कहना है कि ऐसी स्थिति को चिकित्सा जगत में डेक्स्ट्रोकार्डिया विद साइटस इनवर्सस कहा जाता है। गर्भ की भ्रूणावस्था में कुछ वातावरणीय कारणों और वंशानुगत वजहों से ऐसा होता है। इसके अलावा यह गर्भ में शिशु के विकास के दौरान कुछ जीनों के कारण भी होता है। इस वृद्धि के दौरान अंग मिश्रित हो जाते हैं।
भारत में ऐसे केस बहुत ही कम सामने आते हैं। डॉ. राजीव पांडे के अनुसार उनकी 35 वर्ष की प्रैक्टिस में इससे पूर्व वर्ष 1994 में सात वर्षीय बच्ची, 1999 में 35 वर्षीय युवक और वर्ष 2009 में एक पुरुष मरीज की जांच में यही स्थिति पाई गई थी।