300 बेड कोविड अस्पताल में डीजल के नाम पर भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि अप्रैल-मई महीने के दौरान 300 बेड अस्पताल में जनरेटर चलाने पर करीब सवा दो लाख रुपये का डीजल व्यय दर्शाया गया है, जबकि इस अवधि में बिजली कटौती महज कुछ घंटे ही हुई है।
300 बेड कोविड अस्पताल में डीजल के नाम पर भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि अप्रैल-मई महीने के दौरान 300 बेड अस्पताल में जनरेटर चलाने पर करीब सवा दो लाख रुपये का डीजल व्यय दर्शाया गया है, जबकि इस अवधि में बिजली कटौती महज कुछ घंटे ही हुई है।
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अधिक डीजल की खपत
कोविड अस्पताल में दो जनरेटर हैं। बिजली कटौती होने पर इनका उपयोग किया जाता है। अप्रैल-मई में जनरेटर का डीजल खर्च सवा दो लाख रुपये के करीब आया। पूछताछ के दौरान जिम्मेदारों ने बिजली कटौती का हवाला देते हुए अधिक डीजल की खपत होने की बात कही। इस पर जब बिजली अधिकारियों से क्षेत्र में बिजली कटौती का रोस्टर मंगाया गया तो पता चला कि हर रोज 23 घंटे से अधिक बिजली की सप्लाई हुई है।
रोस्टर देखने के बाद सामने आया कि एक महीने के दौरान कुल 24 घंटे भी बिजली गुल नहीं रही है। ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि बिना बिजली कटौती के सवा दो लाख का डीजल भला कैसे फुंक गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी बलबीर सिंह ने बताया प्रकरण उनके संज्ञान में है। शुक्रवार को मौके पर जाकर मामले की पड़ताल करेंगे।