बरेली सिविल लाइंस क्षेत्र के कारोबारी की बेटी ने आगरा निवासी पति, सास-ससुर और ननद के खिलाफ कोतवाली में दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़ और दुष्कर्म समेत अन्य गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। कारोबारी की बेटी का कहना है कि सितंबर, 2017 में आगरा निवासी युवक से वहीं के नामचीन होटल में उसकी शादी हुई थी।
नकदी के अलावा सोना, चांदी और हीरे के जेवरात समेत लाखों का दहेज भी दिया गया। मगर ससुराल वाले संतुष्ट नहीं थे। उसे ननद की शादी के लिए मायके से रुपये लाने के लिए प्रताड़ित किया जाता था। उसके खाते में जमा 60.75 लाख रुपये भी चेक पर जबरन साइन कराकर निकलवा लिए गए। विरोध करने पर खाना नहीं दिया जाता था।
पिटाई करके दो बार उनका गर्भपात करा दिया गया। पति के दूसरी लड़कियों से संबंध थे। ससुर ने उससे छेड़छाड़ की। विरोध किया तो तरह-तरह से प्रताड़ित किया। घर में नौकर होने के बावजूद कुत्ते की गंदगी साफ कराई। एक बार तो उनसे 1002 बार उठक-बैठक लगवाई गई। दोबारा गर्भपात के दौरान हालत बिगड़ने पर 27 मई को उन्हें जबरन मायके भिजवा दिया गया। विवाहिता की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
क्या कहता है कानून
दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के अनुसार दहेज लेने और देने या इसके लेन-देन में सहयोग करने पर पांच वर्ष की कैद के साथ ही 15,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। दहेज के लिए उत्पीड़न करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए जो कि पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा सम्पत्ति अथवा कीमती वस्तुओं के लिए अवैधानिक मांग करने पर 3 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है। धारा 406 के अन्तर्गत लड़की के पति और ससुराल वालों को तीन साल की कैद अथवा जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
सात साल के अंदर मौत होने पर
यदि किसी लड़की की विवाह के सात साल के भीतर असामान्य परिस्थितियों में मौत होती है और यह साबित कर दिया जाता है कि मौत से पहले उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। ऐसी स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी के अन्तर्गत लड़की के पति और रिश्तेदारों को कम से कम सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।