भाई ने कराया था इदरीश का बीमा
आरोपियों की तरफ से अधिवक्ता अमजद सलीम ने अदालत में कहा कि रईस की रुपयों के लेनदेने को लेकर कई लोगों से रंजिश चल रही है। आरोपियों से भी लेनदेन को लेकर रंजिश चल रही थी। इसी खुन्नस में नाम लिखाया गया है। मुकदमे की सुनवाई में यह तथ्य भी आया कि खुद रईस ने अपने भाई का बीमा कराकर उसका नॉमिनी अपनी पत्नी को बनाया था।
भारतीय जीवन बीमा कंपनी का कहना था कि रईस ने इदरीश के कत्ल का झूठा मुकदमा लिखवाया है। बीमा कंपनी ने बीमा निरस्त कर दिया। इससे मामला और संदिग्ध हो गया। इधर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि हत्या का कारण स्पष्ट नहीं है। चूंकि महज कंकाल मिला था। घटना का कोई साक्षी नहीं था। अभियोजन पक्ष अदालत में आरोपियों को दोषी सिद्ध करने में नाकाम रहा। सुनवाई के दौरान आरोपी नायाब हुसैन की मौत हो गई।
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पशुपति नाथ मिश्रा ने आरोपी नवाब हुसैन व शरीफल को दोष मुक्त करार दिया। अधिवक्ता अमजद सलीम ने बताया कि 30 साल चले इस मुकदमे के दौरान आरोपी करीब 70 साल के हो गए। उनसे अब ठीक से चला भी नहीं जाता। बीमा कराकर पत्नी को नॉमिनी बनाना बाद में दावे से मुकरने से मुकदमे में अहम मोड़ आ गया।