कोटवाधाम (बाराबंकी)। सरयू नदी की बाढ़ से तहसील सिरौलीगौसपुर के कई गांव अभी भी पूरी तरह से प्रभावित हैं। इनके गांव से भले ही पानी निकल गया है मगर खेतों में नदी का पानी अभी भी भरा हुआ है। जिसके चलते तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोगों की जिंदगी घरों से बांध तक कैद होकर रह गई है। इन सभी की खेती योग्य जमीन नदी की कटान में समा जाने से अब जीवन यापन को लेकर इनकी परेशानी और बढ़ने लगी हैं।
सिरौलीगौसपुर क्षेत्र में लगभग सैकड़ों एकड़ धान व गन्ना की फसल नदी की धारा में समा चुकी है। हर बार यह लोग पानी कम आने के इंतजार में अपनी फसल लगाते हैं मगर सरयू नदी की बाढ़ किसी का घर तो किसी की फसल को अपने साथ बहा ले जाती है। पूरा साल इनका बांध पर या फिर अपने घर में रहकर गुजारना पड़ता है।
जितनी भी खेती योग्य जमीन है उस पर सरयू नदी द्वारा पानी के साथ काफी मात्रा में रेत भी खेतों में पट जाती हैं। जिससे इस जमीन पर कोई अन्य खेती भी नहीं की जा सकती है और पूरे खेत में बालू ही बालू दिखाई देती है। क्षेत्र के टेपरा, सनावा, भयकपुरवा, तेलवारी, इटहुआ, कहरानपुरवा, गोबरहा इसके अलावा उस पार बसे मांझारायपुर, बेहटा, नव्वनपुरवा, परसवाल आदि गांव की फसल हर वर्ष इस बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है। सरयू नदी का जलस्तर सोमवार से स्थिर है मगर अभी भी खतरा कम नहीं हुआ है। जिस प्रकार नदी घट व बढ़ रही है इससे साफ है कि कभी भी नदी का पानी गांवों तक पहुंच सकता है।
बांध पर बसे लोगों के लिए जमीन तलाशने का काम किया जा रहा है। जैसे ही जमीन मिलती है सभी को पुन: स्थापित कराया जाएगा। नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से काफी नीचे है।
सुरेंद्र पाल विश्वकर्मा, एसडीएम सिरौलीगौसपुर