बाराबंकी। निजी अस्पताल संचालकों की मनमानी का आलम ये हैं कि लाइसेंस का नवीनीकरण कराना तो दूर की बात 45 अस्पताल संचालक ऐसे हैं जिन्हें अभी तक विभाग के पोर्टल पर आवेदन ही नहीं किया है। जबकि ये लोग खुलेआम अस्पताल का संचालन कर मरीजों को इलाज कर रहे हैं। जानकारी के बाद सीएमओ ने ऐसे सभी अस्पताल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश एसीएमओ को दिए हैं।
जिले में पंजीकृत अस्पतालों की संख्या करीब 126 है। इन सभी अस्पताल संचालकों को अपने लाइसेंस का नवीनीकरण 30 जुलाई तक करा लेना चाहिए था लेकिन जांच में पता चला है कि 45 अस्पताल संचालक ऐसे हैं जिन्होंने लाइसेंस का नवीनीकरण कराना तो दूर की बात हैं अभी तक अपना प्रपत्र विभाग के पोर्टल पर अपलोड तक नहीं किए हैं। इससे सहज ही अनुमान लगाया जाता सकता है कि इन अस्पताल संचालकों में विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाई का कोई खौफ नहीं है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल संचालक मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार भी कर रहे हैं जबकि सीएमओ ने पूर्व में जारी आदेश में पहले ही कहा था कि बिना लाइसेंस का नवीनीकरण कराए कोई भी अस्पताल संचालक मरीज को न तो भर्ती करेेगा और न ही इलाज करेगा।
लेकिन मनमानी का आलम ये हैं कि सीएमओ के आदेश को दरकिनार कर अस्पतालों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। शहर के सतरिख नाका, आवास विकास, पल्हरी चौराहा, बड़ेल, बेगमगंज आदि में कई नामचीन अस्पताल हैं जो बिना लाइसेंस का नवीनीकरण कराए ही संचालित किए जा रहे हैं।
जिन अस्पताल संचालकों ने अभी तक अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है। उनके खिलाफ एसीएमओ को जांच कर कार्रवाई केे आदेेश दिए गए हैं। वहीं जिन संचालकों ने अभी तक अपने प्रपत्र विभाग के पोर्टल पर अपलोड नहीं किए हैं उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ