बाराबंकी। अदालत के आदेश की अवमानना के एक दीवानी मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन खान जीशान महमूद ने नगर कोतवाल को तीन दिन और नायब तहसीलदार नवाबगंज को एक माह की सिविल कारावास की सजा सुनाई। इससे पूर्व दोनों को दोषसिद्ध कर कई घंटे कोर्ट में कस्टडी में रखा गया।
अदालत की इस कार्यवाई में पुलिस व प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा रहा। देर शाम एडीजे प्रथम नित्यानंद श्रीनेत ने अपील में पूरे प्रकरण की सुनवाई की और अधीनस्थ न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए 28 सितम्बर सुनवाई की तारीख तय कर दी। इस दौरान पूरे दिन कचहरी परिसर में अफरातफरी का माहौल रहा।
शहर कोतवाली क्षेत्र में एक भूमि पर अदालत के स्थगन आदेश के बाद पुलिस व राजस्व कर्मियों द्वारा जबरन कब्जा करवाकर व निर्माण ध्वस्त कराने के संबंध में आलापुर निवासी मोहम्मद आलम व शकील ने 12 अगस्त को न्यायालय में अवमानना का मुकदमा दाखिल किया था।
सोमवार को इस केस में शहर कोतवाल अमर सिंह व नायब तहसीलदार केशव प्रसाद पेश हुए। जिन्हें कोर्ट ने न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया और सजा पर सुनवाई कर लंच बाद फैसला करने का निर्णय लिया। इस आदेश के साथ ही दीवानी न्यायालय परिसर में अफरातफरी मच गई।
पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी पुलिस बल के साथ को कोर्ट पहुंच गए। वहीं वकीलों की भारी भीड़ जमा हो गई। सिविल जज ने सजा पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात नायब तहसीलदार को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाते हुए एक माह और कोतवाल को तीन दिन की सिविल कारावास की सजा सुनाई।
कोर्ट के आदेश के बाद दोनों लोगों की ओर से सेशन अदालत में अपील दाखिल की गई। जिसकी सुनवाई एडीजे प्रथम की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने अधीनस्थ न्यायालय पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई 28 सितंबर तय की है।
डटे रहे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी
नगर कोतवाल और नायब तहसीलदार को सजा सुनाए जाने के पूर्व से ही एडीएम संदीप गुप्ता, एएसपी अवधेेेश सिंह, सीटो सिटी सीमा यादव व भारी संख्या में पुलिस बल दिन भर डटा रहा। एडीजे द्वारा आदेश पर रोक लगाने के बाद सभी ने राहत की सांस ली।
जमानत अर्जी हुई खारिज
सजा सुनाए जाने के बाद दोनों लोगों की ओर से कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दिया गया और जमानत की याचना की गई। कोर्ट ने जमानत का कोई प्रावधान न पाते हुए अर्जी खारिज कर दी।
दोनों का कृत्य क्षम्य नहीं
सिविल जज जूनियर डिवीजन ने सजा के बिंदु पर आदेश में कहा कि प्रभारी निरीक्षक एक पुलिस अधिकारी है। उनका कृत्य ऐसा है जिससे न्यायिक व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नायब तहसीलदार का कृत्य किसी भी दिशा में क्षम्य नहीं है। उनका कृत्य पूरी न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर अवरोध उत्पन्न करने वाला है।
विपक्षी पक्षकार को नहीं माना दोषी
कोर्ट ने अवमानना मुकदमें में बनाए गए विपक्षी पक्षकार मुस्ममात मोसिना व मोहम्मद सलमान, रिजवान, गुफरान, रिजवान पुत्र बाबू, मुख्तार अहमद, मोहम्मद दाउद के साथ ही उप जिलाधिकारी नवाबगंज व लेखपाल प्रहलाद नारायन तिवारी को किसी तरह का उल्लंघन करने का दोषी नहीं पाया और उनके विरुद्ध प्रार्थना पत्र खारिज कर दिए।