बांदा। मंडल मुख्यालय के ए-क्लास रेलवे स्टेशन के शौचालयों में डेढ़ साल से ताले पड़े हैं। यात्री रेलवे ट्रैक या इधर-उधर शौच संबंधी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा संकट महिला यात्रियों के सामने है।
रेलवे स्टेशन के जीर्ण-शीर्ण शौचालयों को मार्च 2020 में तोड़कर नए सिरे से बनाया गया था। किंतु इनका इस्तेमाल यात्री नहीं कर पा रहे हैं। रेलवे प्रशासन ने शौचालयों में ताला डाल रखा है।
कोरोना काल में ट्रेनों का संचालन बंद होने से इनकी ज्यादा जरूरत भी नहीं रही। अब 80 फीसदी ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ गई है। स्टेशन प्रबंधक केके कुशवाहा का कहना है कि टेंडर न होने से शौचालय बंद हैं। वाणिज्य निरीक्षक संजय कुमार का कहना है कि शौचालयों के ठेके के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन्हें जल्द ही खोल दिया जाएगा।
चंबल एक्सप्रेस से ग्वालियर जा रहे यात्री रमेश ने बताया कि काफी दूर से उन्हें बाथरूम जाने की जरूरत महसूस हो रही थी। रास्ते के छोटे स्टेशनों में ट्रेन भी नहीं रुकती। सोचा था बांदा ए-क्लास स्टेशन है। यहां बाथरूम की अच्छी सुविधा होगी। पर ताले देखकर मायूसी हुई।