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पहाड़ों में खनन की जांच के लिए एनजीटी ने बनाई समिति

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बांदा। नरैनी क्षेत्र में स्थित नहरी और खलारी गांवों के पहाड़ों में हो रहे खनन और क्रशिंग से पर्यावरण नियमों की हो रहे उल्लंघन की याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने चार सदस्यीय संयुक्त समिति गठन और समिति द्वारा मौके पर जाकर तथ्यात्मक स्थिति की हकीकत जांचने के निर्देश दिए हैं। समिति को तीन माह के अंदर अपनी रिपोर्ट एनजीटी में पेश करनी होगी।
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एनजीटी में दायर याचिका में पहाड़ों में हो रहे अवैध खनन और क्रशिंग आदि से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण और आसपास के गांवों को खतरे का हवाला देकर इन पर रोक लगाने और कार्रवाई की मांग की गई है। कहा है कि ब्लास्टिंग और अवैध खनन से क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण हो रहा है।
ग्रामीणों और मवेशियों की जान को खतरा है। यह भी कहा है कि धमाकों से ग्रामीणों के घर ध्वस्त हो गए हैं। तालाब के पानी में जहर पैदा हो गया है। इसे पीकर कई मवेशियों की मौत हो गई। न्यायमूर्ति ब्रजेश सेठी की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के बाद आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया है कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, निदेशक खनन एवं भू वैज्ञानिक विभाग, जिला वन अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट की संयुक्त समिति इस मामले में तथ्यात्मक स्थिति का पता लगाएं।
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एनजीटी ने कहा है कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समन्वय और अनुपालन के लिए इसकी नोडल एजेंसी होगी। संयुक्त समिति को चार सप्ताह के अंदर बैठक करने और मौके पर जाकर जायजा लेने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने तीन महीने के अंदर तथ्यात्मक और कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।
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