बलरामपुर। विशेष सत्र न्यायाधीश ने दलित उत्पीड़न व दुराचार के अभियुक्त को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और सहयोगी को दलित उत्पीड़न का दोषी मानते हुए तीन वर्ष के कैद की सजा सुनाई है।
सरकारी अधिवक्ता रणधीर सिंह ने बताया कि कोतवाली जरवा के एक गांव की महिला ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था कि 31 जनवरी 2015 की रात में गांव के ही हसीब व दद्दन उर्फ अब्दुल हफीज जबरदस्ती घर में घुस गए तथा दलित उत्पीड़न करते हुए दुराचार किया।
न्यायालय के आदेश पर दोनों के विरुद्घ दुराचार व दलित उत्पीड़न का केस दर्ज किया गया। पुलिस ने विवेचना के बाद दोनों के विरुद्घ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सरकारी अधिवक्ता ने आठ गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश दलित उत्पीड़न रजनी सिंह ने हसीब को दुराचार का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास व 28 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने दद्दन उर्फ अब्दुल हफीज को दलित उत्पीड़न का दोषी मानते हुए तीन वर्ष के कारावास व छह हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। (संवाद)