बलिया। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महान गुरु वेद व्यासजी की जयंती पर शिक्षक और छात्र के बीच विशेष बंधन के प्रतीक गुरु पूर्णिमा का पर्व रविवार को मनाया जाएगा। यह जानकारी फेफना क्षेत्र के थम्ह्नपुरा गांव निवासी ज्योतिषाचार्य पं. अखिलेश उपाध्याय ने दी।
उन्होंने बताया कि यह पर्व आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। अंधकार को दूर कर प्रकाश रूपी ज्ञान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। बताया कि गुरु वह व्यक्ति होता है, जो अपने ज्ञान और बुद्धिमत्ता को अपने शिष्यों तक साझा करता है। ऐसी मान्यता है कि गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार होता है।
बताया कि जीवन में पहला स्थान मां को जाता है, उसके बाद पिता, गुरु और फिर भगवान को। हिंदू परंपरा में गुरु को देवताओं से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। शिक्षक व साहित्यकार डॉ. नवचंद्र तिवारी ने कहा कि इस दिन गुरु वेदव्यास का जन्म हुआ था। मान्यता है इसी दिन उन्होंने वेदों की रचना की थी। यद्यपि आज गुरु शिष्य संबंध में बदलाव आया है। बदलते समय व कथित मांग के अनुसार शिक्षा की व्यवस्था का स्वरूप व परिभाषाएं बदली हैं। कहा कि गुरु-शिष्य का पवित्र संबंध सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा।