सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर जेठ मेले के पहले दिन आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। चित्तौरा झील के तट से दरगाह शरीफ तक सिर्फ जायरीन ही नजर आ रहे थे। इस दौरान या गाजी मदद की सदाओं से मेला परिसर गूंजता रहा। झील में डुबकी लगाने के बाद गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए जायरीन दरगाह को रवाना हुए। गोंडा, बहराइच और आसाम रोड पर जायरीन के हुजूम से रह-रहकर जाम लगता रहा। यातायात के सिपाही मौजूद जरूर रहे, लेकिन व्यवस्थाएं बदहाल दिखीं।
सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर जेठ मेले के पहले दिन आस्था का सैलाब रह-रहकर उमड़ता रहा। सुबह से ही चित्तौरा झील के तट पर वाहनों की कतारें लगी रहीं। इस दौरान गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए जायरीन आस्था से लबरेज दिखे। चित्तौरा झील में डुबकी लगाने के बाद जायरीन ने निशान की पूजा की। इसके बाद परंपरा के तहत निशान कंधे पर लेकर जायरीन दरगाह शरीफ को रवाना हुए।
रास्ते में हठीले में पहुंचकर अकीदतमंदों ने अमन-चैन की दुआ की। फिर सभी दरगाह शरीफ पहुंचे। सुबह से शुरू हुआ यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा। मेला परिसर में जायरीन ने सालारबाग, पलरीबाग, जौहराबाग समेत विभिन्न स्थानों पर अपने डेरे लगाए हैं। शाम को मेले के औपचारिक उद्घाटन के साथ ही गाजी की दरगाह पर हाजिरी लगाने के लिए निशान के साथ जायरीन उमड़ पड़े।
चित्तौरा झील व दरगाह शरीफ के मध्य रास्ते में हठीले नामक स्थान पर हजरत रज्जब सालार हठीला की दरगाह है। ऐसी मान्यता है कि यहां पर मुर्गा उड़ाने से दुख दर्द दूर होते हैं। गुरुवार को मेले के पहले दिन काफी संख्या में जायरीन ने इस परंपरा का निर्वहन किया।
मेला परिसर में पावर कॉरपोरेशन के दावे टांय-टांय फिस्स नजर आए। दिन और रात दोनों समय रह-रहकर होने वाली बिजली की ट्रिपिंग और कटौती ने लोगों को बेहाल कर दिया। इस दौरान सबसे अधिक परेशानी दूरदराज से आने वाले जायरीन को हुई।