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मां संग सो रही बच्ची को उठा ले गया तेंदुआ

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बहराइच। गौड़रिया गांव में मां सोती रह गई और तेंदुआ चारपाई से मासूम बच्ची को उठा ले गया। मां को इस घटना की भनक तक नहीं लग सकी। बाद में चारपाई पर बेटी को न देख अचानक उठी मां के होश उड़ गए। बुधवार को खोजबीन के दौरान गांव से एक किलोमीटर दूर बच्ची के कपड़े व हड्डियां मिलीं जिससे उसकी शिनाख्त हो सकी। तेंदुआ बच्ची को निवाला बनाकर भाग गया। घटना की सूचना पर वन क्षेत्राधिकारी ने दौरा किया और पदचिह्नों का परीक्षण किया। उधर, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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बहराइच वन प्रभाग में चकिया रेंज का गौडरिया गांव जंगल से सटा हुआ है। गांव निवासी पांच वर्षीय चांदनी पुत्री कृपाराम निषाद मंगलवार रात मां के साथ घर में सो रही थी। बताया जाता है कि रात में लगभग डेढ़ बजे के आसपास घर में तेंदुआ घुस आया और मां के साथ चारपाई पर सो रही बच्ची को उठा ले गया। मां के साथ सो रही बच्ची को तेंदुआ उठा ले गया और मां को भनक तक नहीं लगी। गांव से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर ले जाकर तेंदुए ने बच्ची को निवाला बनाया। इसके बाद भाग गया। काफी देर बाद जब मां की आंख खुली तो देखा कि बेटी चारपाई से गायब है।
बेटी के न होने पर मां घबरा गई और पति कृपाराम को बेटी के गायब होने की बात बताई। बालिका की तलाश शुरू की गई, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा। बुधवार सुबह सभी ने बालिका की खोजबीन शुरू की। गांव से एक किलोमीटर की दूरी पर बालिका के कपड़े और हड्डियां बरामद हुईं। कपड़ों से परिवार के लोगों ने बालिका की पहचान की। बालिका की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। सूचना रेंज कार्यालय पर दी गई। वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वन्यजीव के मिले पदचिन्हों की जांच की। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि रिपोर्ट डीएफओ को भेज दी गई है।
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बालिका की हड्डियां मिलने के बाद जांच करने आए वन क्षेत्राधिकारी ने पदचिह्नों की जांच की। बरसात के कारण कुछ स्पष्ट नहीं हो सका। वहीं, घटना के बाद से ग्रामीणों में दहशत और गुस्सा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
गौड़रिया गांव में बच्ची की मौत का मामला संज्ञान में आया है। बच्ची के कपड़े व हड्डियां बरामद हुई हैं। घटना स्थल पर जो पदचिह्न मिले हैं उनकी जांच की जा रही है। वैसे जिस तरह बच्ची को पूरा निवाला बना लिया गया, यह प्रवृत्ति भेड़िए में पाई जाती है। फिलहाल जांच की जा रही है। अभी कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।
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- मनीष सिंह, डीएफओ, बहराइच
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