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एफआईआर दर्ज होने के 55 दिन बाद भी नहीं शुरू हुई विवेचना

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बहराइच। मोतीपुर थाना क्षेत्र के ग्रामसभा गुल्हरिया और ग्रामसभा राजापुर कलां में न सिर्फ शौचालयों के लिए आए करोड़ों रुपये डकार लिए गए बल्कि इस पूरे घोटाले को दबाने की भी तैयारी कर ली गई है। प्रायोजित तरीके से इस घोटाले से जुड़े जिम्मेदार प्रकरण की लीपापोती में लग गए हैं। आरोपी को बचाया जा सके इसलिए रातोंरात शौचालयों का निर्माण भी शुरू करा दिया गया है। एफआईआर दर्ज होने के 55 दिन बाद एसएचओ का कहना है कि विभाग से अभिलेख मांगे गए हैं, लेकिन अभिलेख मिल नहीं रहा है जबकि डीपीआरओ ने इस संबंध में कुछ भी बोलने से मना कर दिया। सूत्रों का कहना है कि रातोंरात कुछ शौचालयों का निर्माण करा लिया गया है।
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शौचालयों का निर्माण हुक्मरानों की जानकारी में है। यह सब घोटाले के आरोपियों को क्लीन चिट देने के लिए किया जा रहा है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन परियोजना के अंतर्गत इस समय जिले के सभी गांवों में शौचालय बन रहे हैं। यह कार्यक्रम अभियान के रूप में चलाया जा रहा है, लेकिन पंचायत विभाग के घोटालेबाज इस परियोजना में भी गरीबों का हक मार रहे हैं। गुल्हरिया जगतापुर में करीब 948 के सापेक्ष 269 शौचालयों का ही निर्माण कराया गया। यहां एक करोड़ 13 लाख रुपये अधिकारियों और कर्मचारियों ने दबा लिए। इसी तरह राजापुर में 31 लाख रुपये का गबन किया गया। दोनों में पंचायत सचिव लक्ष्मी नारायण थे जिन पर इन शौचालयों को बनवाने का दारोमदार था। 29 अक्तूबर को इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। पहले तो कुछ दिन डीपीआरओ उमाकांत पांडेय की तरफ से इस घोटाले के आरोपी पंचायत सचिव को बचाया गया, लेकिन जब पूछताछ अधिक होने लगी तो उन्होंने आरोपी को निलंबित कर दिया।
इस हफ्ते सूचना आई कि गांव में कुछ लाभार्थियों के शौचालयों का निर्माण रातोंरात किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ऐसा इसलिए कराया जा रहा है ताकि पुलिस की विवेचना में एफआईआर में लगे आरोप गलत साबित हो जाएं और आरोपी को बचाया जा सके। शायद यही वजह है कि पुलिस के पास अभिलेख अब तक नहीं भेजे गए हैं। एफआईआर दर्ज होने के 55 दिन बाद पुलिस एक कदम भी नहीं चल सकी है। अगर कुछ दिन और निकल गए तो आरोपी को बचाने का नया रास्ता हुक्मरानों को मिल जाएगा। इस प्रकरण पर मोतीपुर थाने के एसएचओ बृजानंद सिंह ने बताया कि पंचायत विभाग से अभिलेख मांगे गए हैं, लेकिन विभाग अभिलेख नहीं दे रहा है। उधर, जिला पंचायत राज अधिकारी उमाकांत पांडेय ने कहीं मीटिंग में जाने का हवाला देकर इस सवाल से किनारा कर लिया।
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