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युवा पीढ़ी समझें, मोबाइल पर भी पढ़े जा सकते हैं प्रेमचंद

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बड़ौत। दौर बदल रहा है। नई पीढ़ी जैसे पूरी तरह सोशल मीडिया में उलझी है। ऐसे में साहित्य युवाओं से दूर हो गया है। भाषा का ज्ञान और जीवन की सीख पर इसका सीधा असर पड़ा है। युवाओं को चाहिए कि वह साहित्य से जुड़ें। किताबों में जो कहानियां हैं, उन्हें समझें। वरिष्ठ साहित्यकार और कवि बलवीर सिंह करुण कहते हैं कि मुंशी प्रेमचंद को पढ़ना भी जरूरी है और समझना भी। सरल भाषा में वह किस तरह जीवन की सीख दे जाते हैं। युवाओं को चाहिए कि वह प्रेमचंद को पढ़ना सीखें। मोबाइल में भी कोई बुराई नहीं, लेकिन मोबाइल पर भी मुंशी प्रेमचंद तो पढ़े जा सकते हैं। साहित्य और समाज को बचाने के लिए यह बहुत जरूरी हैं।
जनता वैदिक डिग्री कॉलेज की हिन्दी विभागाध्यक्ष डा साधना तोमर का कहना है कि साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की रचनाधर्मिता से प्रेरणा लेकर युवाओं को भी सामयिक साहित्य का सृजन करना चाहिए। वह जितनी बार मुंशी को पढ़ेंगे, उतने ही चकित हो जाएंगे, क्योंकि प्रेमचदं घटनाओं को भी इस तरह कहानी मेें पिरो देते थे कि जीवन की बड़ी-बड़ी सीख मिल जाया करती है, उनकी कहानियों आज के दौर में भी प्रासंगिक है।
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जैन स्थानकवासी गर्ल्स डिग्री कॉलेज के प्राचार्या व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता जैन का कहना है कि युवाओं को मुंशी प्रेमचन्द से प्रेरणा लेनी चाहिए। आज के दौर में प्रचलित है, शब्द मर रहे है, लोगों की अभिव्यक्ति क्षमता कम हो रही है, इस संस्कृति के दौर में छात्र समुदाय को भी शामिल किया जाना सुखद है।
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केन्द्रीय विद्यालय के पूर्व व दयानन्द बाल विद्या मंदिर बावली रोड के वर्तमान प्रधानाचार्य विनोद कुमार भारद्वाज का कहना है कि आज खाली समय में हम और हमारे बच्चे मोबाइल चलाते रहते हैं। मुंशी प्रेमचंद हमारे दिलों में हिंदी सम्राट के रूप में आज भी जीवित है। युवाओं को उनसे सीख लेनी चाहिए।
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