वे शुक्रवार को नगर में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। उन्होंने कहा कि मेरी जन्मभूमि के पास ही बरनावा गांव में लाक्षागृह है। 40 साल पहले से मैं भी वहां गुफा देख रही हूं। हमने बाबर का नाम सुना, हुमायूं का नाम सुना अकबर का नाम सुना और औरंगजेब का नाम सुना, लेकिन अब ये बदरुद्दीन कहां से आ गया? प्राचीन टीले से बदरुद्दीन और फदरुद्दीन का कोई लेना देना नहीं है। बदरुद्दीन जैसे लोग भारत की संस्कृति को मिटाना चाहते हैं।
कहा कि महाभारत में प्राचीन टीले पर बने लाक्षागृह में बनी सुरंग से पांडव सुरक्षित निकले थे। इस बात का इतिहास भी साक्षी है और इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता है। अदालत में हमारे साथ न्याय होगा। यह हमारी प्राचीन धरोहर है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि लाक्षागृह को भव्य स्मारक बनाया जाए और इसकी रक्षा और सुरक्षा पर सरकार को काम करना चाहिए।