दो चरणों में किएं गए भौतिक सत्यापन के बाद 966 लाइटों का भुगतान तकरीबन 57 लाख 29 हजार कर दिया गया, लेकिन 234 लाइटों का भुगतान रोक दिया गया। क्योंकि इन लाइटों में से अधिकांश लाइटें या तो मौके से गायब हैं यानी नहीं लगाई गईं। वहीं कुछ लाइटें खराब हालत में पड़ी हैं। विपिन पुनिया, कपिल, हरेंद्र, सोनू, राहुल का कहना है कि यह लाइटें कब जलीं किसी को पता नहीं। यानी मौके पर लाइटें नहीं लगाई गई।
इसके अलावा हिमांशु, सुधीर, आशुतोष का कहना है कि लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी हैं। महज दिखावे की लाइटें लगी हैं, लेकिन यह जलती कभी नहीं। फिलहाल मामले में गोलमाल होने की आंशका को देखते हुए 234 लाइटों का तकरीबन 46 लाख 12 हजार रुपये का भुगतान रोक दिया गया है। डीएम व सीडीओ के आदेश पर मामले की जांच बैठा दी गई है और भौतिक सत्यापन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उधर, ग्राम पंचायतों में ठेकेदारी कार्य से जुड़े कुछ लोगों में हड़कंप मच गया है।
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