बागपत। दिल्ली में गैर जरूरी सामान लेकर जाने वाले वाहनों के घुसने पर रोक लगाने से ईंट भट्ठा व्यवसायियों का करीब एक हजार करोड़ से ऊपर का कारोबार प्रभावित हो गया है। निर्माण सामग्री आपूर्तिकर्ताओं के अतिरिक्त कपड़ा व किराना व्यापारी भी परेशान हैं। शादी का सीजन होने से व्यापारियों की परेशानी ज्यादा बढ़ गई है। यह रोक बढ़ाने को लेकर रविवार को फैसला किया जाना है। इससे स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है।
दिल्ली व एनसीआर में बढ़े प्रदूषण के मद्देनजर गैर जरूरी सामान लेकर जाने वाले बड़े वाहनों की एंट्री बुधवार रात बंद कर दी थी। इससे बागपत के 400 ईंट भट्ठों से सप्लाई रुकने से प्रतिदिन 350 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। अकेले ईंट भट्ठा व्यवसाय पर अभी तक 1050 करोड़ रुपये का असर पड़ चुका है। इसके साथ ही करीब छह हजार मजदूरों का रोजगार छिन गया। इसी तरह निर्माण सामग्री की आपूर्ति भी ठप है। कपड़ा व किरयाना व्यापारियों की परेशानी भी बढ़ गई है। शादी के सीजन में कपड़ा भी नहीं आ रहा है। वहीं, किरयाना का काफी सामान रोक दिया है। इस तरह अकेले बागपत में ईंट भट्ठा व्यवसाय, बिल्डिंग मेटीरियल सप्लायर, कपड़ा व किरयाना व्यापारियों को अभी तक करीब 1200 करोड़ का कारोबार प्रभावित हो चुका है।
एनसीआर में 2700 ईंट भट्ठे
एनसीआर ईंट भट्ठा निर्माता समिति के महामंत्री विक्रम राणा ने बताया कि एनसीआर के मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर व हरियाणा के कई जिलों में 2700 भट्ठे हैं। इन्हें पांच हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हो चुका है। करीब 25 हजार मजदूरों का रोजगार छिन चुका है। उनका कहना है कि सीएनजी से चलने वाले ट्रकों से रोक हटनी चाहिए। भट्ठा मालिक अरविंद राणा उर्फ बिल्लू का कहना है कि पिछले कई दिन से ईंट सप्लाई बंद है। इससे काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
तेल-घी की सप्लाई घटी
किरयाना के थोक व्यापारी विनोद गुप्ता ने बताया कि पिछले कुछ दिन से घी, तेल समेत कई सामान की सप्लाई घट गई है। हालांकि अभी किल्लत नहीं है, लेकिन शादी के सीजन में मांग ज्यादा रहती है। कपड़ा व्यापारी अश्वनी गोयल ने बताया कि यही हाल रहा तो छोटे वाहनों का सहारा लेना पड़ेगा।
किस्त नहीं जमा कर पाने की चिंता
ट्रक मालिक अन्नू जैन के चार ट्रक हैं। इनका संचालन नहीं होने से किस्त जमा नहीं कर पाने की चिंता है। वहीं, बड़ौत के नवीन जैन ने बताया कि दिल्ली में रोक की वजह से कई दिन से ट्रक घर पर खड़े हैं। पहले कोरोना अब प्रदूषण परेशानी बढ़ा रहा है।