2015 के बाद बढ़ा खतरा
वैज्ञानिक डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गन्ना, धान, गेहूं और आलू मुख्य फसलों में शामिल है। सब्जी और दलहनी फसलों का रकबा भी काफी है। वर्ष 2015 के बाद इन फसलों पर छह खतरनाक कीटों का खतरा बढ़ा है। ये तमाम फसलें अब रोग वाली हो चली है। कृषि वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के अनुसार यह छह कीट फसलों की क्वालिटी को बिगाड़ रहे है।
इन जनपदों में सबसे ज्यादा असर
बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बुलंदशहर, एटा, आगरा, मथुरा, हाथरस, बरेली, लखीमपुरखीरी, बदायूं, गोरखपुर, मुरादाबाद, आजमगढ़, संभल, इटावा, मेरठ, गाजियाबाद, मैनपुरी, कासगंज, फिरोजाबाद में इन कीटों का ज्यादा असर है।
बार-बार बदलनी पड़ रही दवा, मात्रा भी बढ़ रही
एडीओ कृषि रक्षा नरेश कुमार का कहना है कि मार्केट में कीटों के खात्मे के लिए कोरोजन, एनिडा, क्लोरो सहित तमात दवाइयां उपलब्ध है, लेकिन अब धीरे-धीरे इन दवाइयों का असर भी कीटों पर नहीं हो रहा है। बड़ौत नगर के कीटनाशक विक्रेता संजीव बताते है कि काफी समय से इस व्यवसाय में है। उन्होंने बताया कि कीटों को मारने के लिए साइपर मीथने दवा लंबे समय से प्रचलन में है। पहले कम मात्रा में दवाई के इस्तेमाल से कीट मर जाते थे, लेकिन अब मात्रा बढ़ाने के बाद भी कीट नहीं मर रहे। किसान विपिन पूनिया के अनुसार धीरे-धीरे कीट भी दवा के आदी होते जा रहे है।
कीटों के नाम प्रभावित फसलें
व्हाइट गर्भ (सफेद सूंडी) गन्ना, मूंगफली, आलू, शकरकंद
सफेद मक्खी भिंडी, आलू, मूंग, मिर्च, टमाटर, सभी चौडे़ पत्ते वाले पौधे
टिड्डा गन्ना, धान, ज्वार, बाजरा
गंधी धान की बोलियों का रस जूसकर सूखा देता है।
माहू यह नाजुक कीट है। सरसों, गोभी, जौौ, मूली, शलजम, आलू
दीमक गन्ना, धान, गेहूं, सरसों और सभी फलवाले पौधे