डूडा और नगर पालिका-पंचायत अफसर भी घपले में शामिल
बागपत। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में घपला करने में डूडा व नगर पालिका-पंचायत दोनों के अधिकारी शामिल रहे। क्योंकि पात्रों का प्राइवेट कंपनी सत्यापन करती है, उसके बाद डूडा व नगर पालिका-पंचायत के अधिकारियों पर जांच की जिम्मेदारी होती है।
योजना में पक्का मकान बनवाने के लिए कोई डूडा (जिला शहरी विकास अभिकरण) में आवेदन करता है, तो उसके सत्यापन के लिए दो प्राइवेट कंपनियों को जिम्मेदारी दी गई है। यहां से ही खेल की शुरुआत होती है। निजी कंपनियों के कर्मचारी खेल करके फाइल को आगे बढ़ा देते हैं। इसके बाद डूडा व नगर पालिका-पंचायतों के अधिकारियों को जांच करनी होती है कि आवेदनकर्ता पात्र है या नहीं। इसमें देखा जाता है कि सरकार के नियमों के अनुसार आवेदन कर्ता गरीब हो, उसके पास पहले कोई पक्का मकान नहीं हो, वह नगर पालिका-पंचायत के दायरे में आता हो, जमीन उसके नाम हो आदि। अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के बाद ही आवेदनकर्ता को योजना का लाभ देते हुए तीन किस्त में ढाई लाख रुपये जारी किए जाते हैं।
अमीनगर सराय व बागपत में सबसे ज्यादा अपात्र
डूडा के अधिकारियों ने अमीनगर सराय व बागपत में सबसे ज्यादा अपात्रों पर ढाई-ढाई लाख रुपये लुटाए। इन जगहों पर करीब 40 प्रतिशत को योजना का गलत लाभ दिया गया है। इस तरह से करोड़ों रुपये का सरकार को चूना लगाया गया। दोघट के हालात भी काफी खराब हैं। वहां पहले से पक्का मकान होने के बावजूद डूडा से योजना का लाभ दे दिया गया।
वर्जन
जब कोई आवेदन करता है तो उसका सत्यापन पहले निजी कंपनी के कर्मचारी करते हैं। उसके बाद नगर पालिका-पंचायत के अधिकारी जांच करते हैं। इसके बाद डूडा की ओर से रुपये भेजे जाते हैं। इसमें नगर पालिका-पंचायत के अधिकारियों की भी पूरी जिम्मेदारी बनती है।
- रजनी पुंडीर, परियोजना अधिकारी डूडा