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सावधान, कहीं आंखों की रोशनी ना छीन ले चटक रंगों की होली

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- 1000 से अधिक लोगों की आंखों में हो जाती है दिक्कतें हर साल होली पर
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- चिकित्सा विशेषज्ञों ने दी प्राकृतिक रंगों से होली खेलने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। होली पर बेहद चटख गुलाल, हरे, लाल, काले, पीले और चमकदार रंगों से होली खेलने की चाहत में तो जरा संभलकर। क्योंकि हर साल होली पर 1000 से अधिक लोगों की आंखों में केमिकल युक्त रंग डलने से दिक्कतें उत्पन्न हो जाती है, जिसके बाद वे जिला अस्पताल के अलावा सोनीपत, हरियाणा, दिल्ली, नोएडा सहित अन्य जगहों पर इलाज कराते है। नेत्ररोग और त्वचारोग विशेषज्ञों की माने की चटख रंगों में मौजूद जस्ता, सीसा, अभ्रक, सिलिका, पोटेशियम, क्रोमियम जैसे खतरनाक तत्व आंखों व त्वचा के लिए बेहद खतरनाक हैं। सलाह है कि प्राकृतिक रंगों से ही होली खेले।
आंखों की रोशनी पर पड़ता है सीधा असर
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरए गर्ग और डॉ. अरविंद जैन के मुताबिक होली पर केमिकल युक्त रंगों से आंखों को बचाना बेहद जरूरी है। रंगों में मौजूद रासायनिक तत्वों की आंखों में चले जाने से एलर्जी होने का गंभीर खतरा रहता है। यदि तत्काल सफाई ना की जाए तो कई बार आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा पैदा हो जाता है। उन्होंने बताया कि हर साल अस्पतालों में एक हजार से अधिक लोग ऐसे आते है, जिनकी आंखों में होली खेलते वक्त केमिकल युक्त रंग गिर जाता है। बहुत से लोग जनपद के अलावा बाहर भी अपना इलाज कराते है।
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ये तत्व बनाते है रंगों को नुकसानदायक
चिकित्सकों के अनुसार रंगों में मौजूद रासायनिक तत्व सीसा, क्रोमियम, सिल्का, पोटेशियम से दो तरह की समस्याएं खड़ी होती हैं। पहला प्रभाव इरिटेंट कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस (आईसीडी) होली खेलने के तुरंत बाद दिखाई देता है, जिसे शरीर में जबरदस्त खुजली और आंखों में जलन होती जाती हैं। दूसरा असर एलर्जी कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस (एसीडी) के रूप में दिखाई देता है। इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलते हैं। होली खेलने के दौरान केमिकल युक्त रंगों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाए तो सूजन हो जाती है। ऐसे में बेहतर है कि होली के दौरान खतरनाक चटक रंगों से परहेज कर हर्बल रंगों से ही होली खेली जाएं।
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ये बरते सावधानी
- होली खेलते समय खतरनाक रंगों से बचें।
- यदि रंग आंखों में चले जाएं तो तत्काल पानी के छींटे मारकर साफ करें।
- होली खेलने से पहले हाथ और चेहरे पर नारियल या सरसों का तेल लगा लें
- शरीर पर लगे रंगों को साबुन से कतई ना छुड़ाएं। एलर्जी होने का खतरा रहता है।
- कोशिश करें कि प्राकृतिक रंगों यानी हर्बल कलर से ही होली खेलें
केमिकल के रंगों से बचाव के तरीके बताए
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बागपत। एसपीसी डिग्री कॉलेज में बुधवार को एक दिवसीय एनएसएस शिविर का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना की चारों इकाईयों के स्वयंसेवकों नेलोगों को केमिकल युक्त रंगों से बचाव के बारे में जागरूक किया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ प्रदीप कुमार के निर्देशन में प्रथम इकाई ने अर्जुनपुरम, डॉ उमलेश रानी के निर्देशन में गायत्रीपुरम, डॉ गीता के निर्देशन में वाल्मीकि बस्ती और सुशील कुमार के निर्देशन में मास्टर कालोनी में स्वयं सेवकों ने लोगों को होली के त्योहार पर एक-दूसरे को रंग लगाने के तरीके और केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग न करने के लिए जागरूक किया। उन्होंने त्योहार पर पानी बर्बाद न करने, पेड़-पौधों को न रंगने के लिए भी जागरूक किया। होली पर्व प्रेम से मनाने की अपील की।
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