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नौंवीं मुहर्रम पर घरों में रखे गए ताजिया

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मेजवां। फूलपुर और ग्रामीण क्षेत्रों में नौंवी मुहर्रम को ताजिया घरों में रखा गया। बड़े ताजिया इमामबारगाह में स्थापित किया गया। जहां पूरी रात नौहा मातम जारी रहा। इस दौरान सभी जाति धर्म के लोग ताजिया के सामने आकर मन्नतें मांगी। इस दौरान इमामबारगाह ‘या अली मौला’ की सदा से गूंज उठा।
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शायर कैफी आजमी के पैतृक गांव मेजवां गांव में अंजुमन-ए-अब्बासिया के लोगों ने गांव स्थित मरहूम शाकिर के इमाम बारगाह में मातम किया। जहां अली असगर का झूला की जियारत कराई गई। मौलाना शकील फ़राज ने दसवीं मुहर्रम के बारे में लोगों को बताया। इस बीच अजादार घर-घर पहुंच ‘सलाम-ए-कर्बला वालों’ पढ़ते हुए मातम करते हुए ताजिया रखा। इस क्रम में चमावां, दसमडा, कंदरी, कुशलगांव, नाहरपुर, शाहजेरपुर, मित्तूपुर, मकसूदन चक, रकबा आदि गांवों में ताजिया इमामबारगाह तक ही सीमित रहे। दसमडा गांव के इमामबारगाह में मौलाना अमीर हैदर और सैय्यद मोहम्मद अब्बास ने मजलिस को खिताब किया। सैय्यद हाशिम हुसैन के अजाखाने में अंजुमन गुलजारे पंजतन ने नौहा ख्वानी और सीना जनी किया।
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