दो दशक पूर्व तक वास्तव में यह इलाका अवैध असलहा का बड़ा कारखाना हुआ करता था। तमसा नदी तट के किनारे कई अवैध असलहा कारोबारी अवैध रुप से असलहा बनाते व बेचते थे। वर्तमान में बम्हौर गांव में अवैध असलहा बनाने की फैक्ट्री तो बंद हो चुकी है। लेकिन दो दशक पूर्व इसी बम्हौर में निर्मित असलहे से कैसेट किंग की हत्या के बाद और अब गुलशन कुमार हत्याकांड में बांबे कोर्ट का फैसला आने पर जिला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
गुलशन कुमार हत्याकांड में प्रयुक्त असलहे पर मेड इन बम्हौर लिखा हुआ था। बम्हौर को खोजते-खोजते मुंबई पुलिस जिले तक गुलशन कुमार हत्याकांड के तार जोड़ने आजमगढ़ तक आ गई थी। खोजबीन में पता चला था कि कानपुर की फील्ड गन फैक्ट्री में बम्हौर निवासी देवनाथ काम करता था।
गन फक्ट्री की नौकरी छोड़ने के बाद वह बम्हौर लौट आया था और यहीं अवैध असलहे का कारोबार शुरू कर दिया था। जिस तमंचे से कैसेट किंग की हत्या हुई उसे देवनाथ ने ही बनाया था और उस पर मेड इन बम्हौर लिख कर उसकी हत्यारों को सप्लाई किया था। गुलशन कुमार हत्याकांड में देवनाथ द्वारा बनाया गया तमंचा ही एक तार के रूप में जुड़ा।