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विदेशों में ऑनलाइन के माध्यम से संस्कृत भाषा का दे रहीं ज्ञान

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निजामाबाद के फरहाबाद निवासी कैलाश मिश्रा की पुत्री अर्चना विदेशियों को आनलाइन संस्कृत सिखा रही हैं। संस्कृत पढ़ने वालों में यूक्रेन, रोमानिया, मॉरीशस, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका व दुबई देश के नागरिक शामिल हैं।
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अर्चना को संस्कृत के प्रति काफी लगाव रहा है। बंगलूरू में पढ़ाई के दौरान वह आर्ट ऑफ लिविंग के संपर्क में आई। संस्कृत में उनकी रुचि देख कर श्री श्री रविशंकर भी प्रभावित हुए। उन्होंने 2009 में आश्रम के वेद विज्ञान महाविद्यालय पीठ में संस्कृत पढ़ाने का मौका दिया। कुछ विदेशी बच्चों को संस्कृत की शिक्षा दी। उसके बाद उन्होंने गुरुकुल में बच्चों को पढ़ाया। संस्कृत में एमए करने के बाद कानून की पढ़ाई करने वाली अर्चना ने कुछ समय तक हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस भी की लेकिन पारिवारिक कारणों से कुछ दिनों बाद वह घर लौट आईं। 2020 में अर्चना को लगा कि संस्कृत भाषा को एक नई दिशा देकर उसे बढ़ावा देना चाहिए इसके लिए कुछ करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन संस्कृत पढ़ाना शुरू किया। कुछ दिन में ही देश विदेश से बहुत से लोग ऑनलाइन के माध्यम से जुड़ते गए। प्रतिदिन 5 से 6 बैच चलाती है। जिसमें 200 से ज्यादा लोग जुड़ते गए। इस समय संस्कृत भाषा के वर्णमाला के ऊपर विस्तार से हर शब्दों के ज्ञान को दर्शाते हुए पुस्तक लिखकर व संस्कृत भाषा को नया आयाम दे रही हैं।
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