बिधूना (औरैया)। यूपी नेडा द्वारा तीन करोड़ की लागत से कुदरकोट में बनाया गया मिनी ग्रिड सोलर पावर प्लांट पांच साल बाद भी लोगों के काम नहीं आ सका। प्लांट से बिजली देने के लिए घरों में मीटर भी लगा दिए गए लेकिन बिजली नहीं मिल सकी। ऐसे में पावर प्लांट सफेद हाथी साबित हो रहा है।
यूपी नेडा ने वर्ष 2016-17 में एरवाकटरा ब्लाक के कुदरकोट में 175 किलो वाट क्षमता का मिनी ग्रिड पावर सोलर प्लांट स्थापित किया था। इस प्लांट से कुदरकोट के साथ इसके मजरे के 6954 की आबादी को बिजली मिलनी थी। विभाग ने लोगों को भरोसा दिया था कि इस पावर प्लांट की स्थापना के बाद बिजली के अधिक बिल और कटौती की झंझट से छुटकारा मिलेगा। विभाग ने तेजी से इसका निर्माण करा सोलर पैनल लगवाए। कुछ गांव में कनेक्शन के लिए मीटर भी लगवा दिए गए। शुरुआत के दिनों में कुछ घर रोशन हुए। लेकिन विभागीय उपेक्षा के कारण सरकार की योजना ठप होती चली गई। स्थिति यह है कि पावर प्लांट से मिलने वाली बिजली सपना बनकर रह गई है।
लोगों ने बताई समस्या
दिनेश कुमार बाथम ने बताया कि जब प्लांट की स्थापना हुई थी, तो लोगों में खुशी थी। उम्मीद थी कि गांव जगमगाएगा। प्लांट तो स्थापित हो गया लेकिन सुविधा शून्य रही। लोग अंधेरे में रहने पर मजबूर हैं।
रामू चौरसिया ने बताया कि कुदरकोट में प्लांट से कोई सुविधा नहीं मिल रही है। मकानों पर मीटर लगा दिए लेकिन बिजली सप्लाई नहीं हो रही है। सालों से प्लांट सफेद हाथी साबित हो रहा है।
योगेश तिवारी ने बताया कि प्लांट की स्थापना पर जितनी खुशी मिली थी, उतनी ही समय बीतने के बाद निराशा मिल रही है। ग्रामीणों नेे कई बार मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी से शिकायत कर प्लांट से सप्लाई से चालू करने मांग की लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
दुष्यंत गुप्ता ने बताया कि जब प्लांट बनकर तैयार हुआ तो विभाग से ठेकेदार उनके घर आए। बिजली सप्लाई के लिए कनेक्शन कर मीटर लगा गए। उम्मीद थी कि अब राहत मिलेगी। लेकिन विभागीय उपेक्षाओं ने अरमानों पर पानी फेर दिया।
प्लांट से लोगों को बिजली आपूर्ति हो रही है। फिर भी यदि किसी भी तरह की समस्या आ रही है तो एक बार निरीक्षण कर हकीकत जांची जाएगी। इस गांव से किसी ने शिकायत कर समस्या नहीं बताई है। - नरेंद्र सिंह परियोजना अधिकारी नेडा