फोटो 09 एयूआरपी 01 - घर पर हलछठ की पूजा करती महिलाएं
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औरैया। संतान की लंबी आयु व सुख समृद्धि के लिए महिलाओं ने रविवार को हलछठ का पर्व मनाया और व्रत रखा।
मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण के भाई बलराम का जन्म हुआ था। इसलिए इसे बलराम जयंती भी कहा जाता है। एक और मान्यता है कि अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने अपने पुत्र परीक्षित की लंबी आयु के लिए हलछठ का व्रत रखा था। जिससे उनका पुत्र जीवित रहा। हल छठ का पर्व रविवार को पूरे जनपद में मनाया गया।
सुबह से ही बाजार में पूजा की सामग्री लेने के लिए लोग लॉकडाउन के दौरान भी दिखाई दिए। घरों में होने वाली इस पूजा का बहुत ही महत्व माना जाता है। माताएं अपने संतानों की खुशहाली व परिवार की सुख समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। उनका मानना है कि जिस दिन बलराम का जन्म हुआ था उसी दिन से इस पर्व की शुरुआत हुई है। इसलिए वह लोग बिना हल के जुते हुए नाज का भोग लगाकर भगवान को प्रसन्न करती हैं।